श्रीनगर जाने की जरुरत नहीं ,अब जम्मू की तवी नदी में ही लें शिकारा का आनंद
जम्मू की पवित्र तवी नदी में श्रीनगर की डल झील की तर्ज पर पहली बार पारंपरिक शिकारा नौकायन शुरू हुआ है, जिससे पर्यटन को नया आयाम मिला है।

जम्मू/एजेंसी। मंदिरों के शहर जम्मू में पर्यटन को एक नया और ऐतिहासिक आयाम मिला है। शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली पवित्र सूर्यपुत्री तवी नदी में पहली बार श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील की तर्ज पर पारंपरिक शिकारे उतारे गए हैं। इससे पहले तवी नदी में आधुनिक मोटर बोटें लोगों को आकर्षित कर चुकी हैं।
श्री अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे के जम्मू से रवाना होने की पूर्व संध्या पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तवी नदी में बोटिंग सेवा का शुभारंभ किया। इसी के साथ पारंपरिक शिकारे भी नदी में उतारे गए, जो अब पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गए हैं।
इससे पूर्व जनवरी और अप्रैल माह में बैसाखी के अवसर पर तवी नदी में बोटिंग की शुरुआत की गई थी। अब अमरनाथ यात्रा के दौरान भी यह सुविधा निरंतर जारी रहेगी।
तवी रिवर फ्रंट के किनारे बहती तवी नदी में चलते शिकारे हर किसी का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोटर बोटों के साथ एसडीआरएफ की बोटें भी तैनात की गई हैं, ताकि लोग सुरक्षित रूप से नौका विहार का आनंद ले सकें।
पर्यटकों में इस नई सुविधा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। गुजरात की सुलक्षण और दिल्ली के दिलीप द्विवेदी ने बताया कि वे अमरनाथ यात्रा के बाद शिकारे की सवारी के लिए श्रीनगर जाने की योजना बना रहे थे, लेकिन अब जम्मू में ही यह अनुभव मिल गया।
बोटिंग के लिए व्यस्कों के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए यह सुविधा निशुल्क रखी गई है।




