मां विंध्यवासिनी के धाममें डिजिटल हुआ चढ़ावा, क्यूआर कोड से श्रद्धालु कर रहे दान
विंध्यधाम में मां विंध्यवासिनी मंदिर में अब श्रद्धालु क्यूआर कोड स्कैन कर डिजिटल दान कर रहे हैं। यह पहल चढ़ावा व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और सुविधाजनक बना रही है, जिससे अब तक 18 हजार रुपये ऑनलाइन प्राप्त हुए हैं।

मीरजापुर/उत्तर प्रदेश। विंध्य धाम में आस्था अब डिजिटल रूप ले रही है। मां विंध्यवासिनी के दरबार में दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालु अब नकद के साथ-साथ मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर भी चढ़ावा अर्पित कर रहे हैं। जिला प्रशासन की इस पहल से दान व्यवस्था अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सुविधाजनक बन गई है।
सात जून से शुरू हुई क्यूआर कोड आधारित दान व्यवस्था को श्रद्धालुओं का अच्छा समर्थन मिल रहा है। अब तक करीब 18 हजार रुपये ऑनलाइन चढ़ावे के रूप में प्राप्त हो चुके हैं। मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से श्रद्धालु कुछ ही सेकेंड में अपनी श्रद्धानुसार दान कर रहे हैं। प्रशासन भी लोगों को डिजिटल माध्यम अपनाने के लिए जागरूक कर रहा है।
मां विंध्यवासिनी, मां काली खोह और मां अष्टभुजा धाम का त्रिकोण देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर विंध्य धाम में हुए विकास कार्यों के बीच अब धार्मिक व्यवस्थाओं को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
डिजिटल दान व्यवस्था के तहत चढ़ावे की राशि सीधे विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद के बैंक खाते में जमा हो रही है। इससे दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो गई है, नकदी के रखरखाव की आवश्यकता कम हुई है और श्रद्धालुओं को सुरक्षित व सरल विकल्प मिल रहा है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में ऑनलाइन दान करने वालों की संख्या में और वृद्धि होगी।
नगर मजिस्ट्रेट एवं विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद के सचिव अविनाश सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और दान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन चढ़ावा की व्यवस्था शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु नकद के साथ डिजिटल माध्यम से भी अपनी श्रद्धा अनुसार दान कर सकते हैं और इस व्यवस्था के प्रति लोगों का सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है।




