डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर संगोष्ठी आयोजित, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता पर दिया गया जोर

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी, शाहदरा जिला द्वारा महान राष्ट्रवादी चिंतक, प्रख्यात शिक्षाविद् और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में कड़कड़डूमा स्थित हॉलमार्क बैंक्वेट में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, प्रबुद्धजनों एवं गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, शाहदरा जिला प्रभारी एवं मुख्य वक्ता डॉ. अनिल गुप्ता तथा डॉ. धीरज जोशी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा शाहदरा जिला अध्यक्ष दीपक गाबा ने की।
अपने संबोधन में हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रवाद, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य वक्ता डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित रहा। उन्होंने “एक देश, एक विधान, एक प्रधान और एक निशान” के उनके संकल्प को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता उनके आदर्शों से प्रेरित होकर राष्ट्र सेवा में जुटे हैं।
डॉ. धीरज जोशी ने अपने वक्तव्य में डॉ. मुखर्जी के जीवन, संघर्ष और उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त विचारधारा थे। उन्होंने नई पीढ़ी से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
जिला अध्यक्ष दीपक गाबा ने कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य युवाओं को डॉ. मुखर्जी के विचारों और उनके योगदान से परिचित कराना है, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला महामंत्री अनिल प्रकाश शर्मा, गीता शर्मा और सुंदर चौधरी तथा कार्यक्रम संयोजक सुशील उपाध्याय एवं उर्मिल राजौर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में उपस्थित सभी लोगों ने “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।

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