महाशिवरात्रि पर लाडले मशक दरगाह में होगी शिव पूजा

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष में सुनाया फैसला

नई दिल्ली/एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कर्नाटक के अलंद में महाशिवरात्रि के दौरान लाडले मशक दरगाह परिसर और हिंदू संत राघव चैतन्य की समाधि के अंदर पूजा करने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि जब यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में लंबित है, तो याचिकाकर्ता संविधान के आर्टिकल 32 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट खलील अंसारी नाम के व्यक्ति की अर्जी पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें संपत्ति में हस्तक्षेप को रोकने और संपत्ति पर निजी बचाव पक्ष के कब्जे को रोकने के लिए किसी भी तरह की गैर-कानूनी प्रवेश, भीड़, जमावड़े को रोकने के साथ-साथ पूजा की इजाजत देने वाले किसी भी अंतरिम आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
दरगाह 14वीं सदी के सूफी संत और 15वीं सदी के हिंदू संत से जुड़ी है और ऐतिहासिक रूप से दोनों की पूजा की साझा जगह रही है। हालांकि, 2022 में दरगाह पर धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद होने पर तनाव बढ़ गया, जिससे सांप्रदायिक अशांति फैल गई।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर वकील विभा दत्ता मखीजा ने कहा कि हाई कोर्ट पहले ही इस मामले पर फैसला कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता घोषित करने की मांग कर रहा है कि प्रॉपर्टी सही तरीके से नोटिफाइड वक्फ प्रॉपर्टी है, जिस पर वक्फ ट्रिब्यूनल को फैसला करना है। मखीजा ने कहा कि इस मामले में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं और बेंच से आग्रह किया कि इसे ऐसे ही मामलों के साथ टैग किया जा सकता है।
हालांकि, बेंच ने दखल देने से इनकार कर दिया और केस को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया गया। फरवरी 2025 में, कर्नाटक हाई कोर्ट ने 15 हिंदू भक्तों को राघव चैतन्य शिवलिंग पर शिवरात्रि की रस्में करने की इजाजत दी थी।

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