एमबीवीवी क्राइम ब्रांच ने वॉन्टेड नाइजीरियाई ड्रग तस्कर को दबोचा, 56.12 लाख रुपए की एम्फ़ैटेमिन ज़ब्त

कांती जाधव/मुंबई ब्यूरो। मीरा-भयंदर-वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ड्रग तस्करी मामले में वांछित एक नाइजीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है और उसके पास से 56.12 लाख रुपये मूल्य की एम्फ़ैटेमिन जब्त की है।
आरोपी की पहचान हेनरी उचेन्ना उवाकवे (38) के रूप में हुई है, जो नाइजीरिया का नागरिक है। उसे वसई स्थित क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने एक सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया, जिसमें बताया गया था कि वह कलांब-राजोदी इलाके में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर, पुलिस ने 17 दिसंबर को दोपहर लगभग 3.45 बजे विरार पश्चिम के कलांब-राजोदी रोड पर छापा मारा और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
आरोपी मूल रूप से नाइजीरिया के अबुजा का निवासी है और वर्तमान में नालासोपारा वेस्ट में रह रहा था। तुलिंज पुलिस स्टेशन में 5.60 करोड़ रुपये मूल्य के मेफेड्रोन (एमडी) की ज़ब्ती से जुड़े एक मामले में उवाकवे वांछित था। ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने आरोपी से 280 ग्राम एम्फ़ैटेमिन और एक मोबाइल फोन बरामद किया। ज़ब्त किए गए प्रतिबंधित पदार्थों का कुल मूल्य लगभग 56,12,000 रुपये आंका गया है। जब्ती के बाद, आरोपी के खिलाफ अरनाला सागरी पुलिस स्टेशन में मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 की धारा 8(सी), 21, 21(सी), 22 और 29 के साथ-साथ विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत एक नया मामला दर्ज किया गया है। आगे की जांच जारी है।
ड्रग्स की तस्करी महज़ एक अपराध नहीं, बल्कि यह एक संगठित उद्योग है जिसमें अंतरराष्ट्रीय गिरोह, स्थानीय एजेंट और भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत शामिल होती है। नाइजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि विदेशी नागरिक भी भारत में सक्रिय नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी पहले से ही 5.6 करोड़ रुपये के एमडी ड्रग्स मामले में वांछित था, जो यह दर्शाता है कि ऐसे अपराधी लंबे समय तक बच निकलते हैं—कहीं न कहीं भ्रष्टाचार और लापरवाही इसका कारण है।
एम्फ़ैटेमिन और एमडी जैसे सिंथेटिक ड्रग्स सीधे तौर पर युवाओं को निशाना बनाते हैं। यह नशा न केवल स्वास्थ्य को बर्बाद करता है बल्कि भविष्य को भी अंधकारमय बना देता है। नशे की लत परिवारों को तोड़ती है, रिश्तों में दरार डालती है और अपराध को जन्म देती है। आर्थिक नुकसान: ड्रग्स का व्यापार काले धन को बढ़ावा देता है, जिससे वैध अर्थव्यवस्था कमजोर होती है और भ्रष्टाचार को बल मिलता है।
पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह केवल एक शुरुआत है। जब तक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और स्थानीय भ्रष्ट तंत्र पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे। समाज को भी जागरूक होना होगा—क्योंकि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

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