विजिलेंस अफसर की हत्या की साजिश, करोड़ों के लोन घोटाले में बैंक मैनेजर ने दी थी सुपारी

तीन आरोपी गिरफ्तार, मैनेजर फरार

  • इंडियन ओवरसीज बैंक मेरठ, सहारपुर में करोड़ों का लोन घोटाला
  • जांच करने आए विजिलेंस ऑफिसर को ठिकाने लगाने की रची साजिश
  • बैंक मैनेजर ने एक युवक को दी थी हत्या की सुपारी, दो बार हमला
  • पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार, बैंक मैनेजर अभी फरार

मेरठ/उत्तर प्रदेश। मेरठ और सहारनपुर में इंडियन ओवरसीज बैंक में हुए करोड़ों के लोन घोटाले को दबाने के लिए एक खौफनाक साजिश रची गई। बैंक में हुए फर्जी लोन घोटाले की गोपनीय रिपोर्ट को रोके जाने के मकसद से विजिलेंस अफसर जितेंद्र कुमार की हत्या की साजिश रची गई थी। उन पर दो बार हमला हुआ, लेकिन दोनों बार वे बाल-बाल बच गए। मेरठ पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी सहारनपुर स्थित बैंक ब्रांच का मैनेजर मनोज कुमार अभी फरार है।
एसपी सिटी मेरठ आयुष विक्रम सिंह के मुताबिक, 24 फरवरी को परतापुर क्षेत्र में बिजली बंबा रोड पर विजिलेंस अफसर जितेंद्र कुमार पर गोली चलाई गई थी। इसके बाद 1 मार्च को सहारनपुर के रामपुर मनिहार में उन पर दोबारा हमला हुआ। दोनों हमलों में वह सुरक्षित बच गए। जांच में सामने आया कि ये हमले सहारनपुर में बैंक में हुए बड़े लोन घोटाले से जुड़े थे।एसपी सिटी ने कहा कि सहारनपुर के घंटाघर ब्रांच में तैनात बैंक मैनेजर मनोज कुमार ने विजिलेंस अफसर की हत्या की साजिश रची थी। बैंक में चल रहे फर्जीवाड़े की जांच विजिलेंस टीम कर रही थी, जिसमें खुद मनोज कुमार की संलिप्तता सामने आई थी। साजिश के तहत मनोज ने लोन डिफॉल्टर बाबर निवासी सहारनपुर से संपर्क किया और हत्या की सुपारी दी।
एसपी सिटी आयुष बिक्रम सिंह ने बताया कि बैंक मैनेजर मनोज कुमार ने बाबर को लालच दिया कि यदि वह विजिलेंस अफसर की हत्या करवा देता है, तो उसका लोन माफ करवा देगा। इसके एवज में उसे 65 हजार रुपये भी दिए गए, जिनसे रेकी और हथियार खरीदे गए। बाबर ने देवबंद के दो युवकों कार्तिक शर्मा और निखिल शर्मा को शूटर के रूप में बुलाया।
दोनों ने जितेंद्र कुमार की रेकी की और उन पर जानलेवा हमले किए। पुलिस ने बाबर, निखिल और कार्तिक को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों के खिलाफ मेरठ और सहारनपुर में मुकदमा दर्ज है। फिलहाल बैंक मैनेजर मनोज कुमार फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।
जांच में खुलासा हुआ है कि सहारनपुर की मंगलपांडेनगर और घंटाघर ब्रांच में पिछले एक साल में 40 से 50 लोन फाइलें पास की गई थीं। इन पर 5 करोड़ से अधिक का लोन जारी किया गया। चेन्नई स्थित बैंक हेड ऑफिस और विजिलेंस टीम ने जब जांच की, तो पाया गया कि लोन लेने वाले अधिकांश आवेदकों के दस्तावेज फर्जी थे। फर्जी आधार कार्ड और कागजातों के आधार पर लोन जारी किए गए। शुरुआती अनुमान है कि यह घोटाला 20 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। बैंक के अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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