ज्ञानवापी पर ऐतिहासिक फैसला देने वाले जज अजय कृष्ण राष्ट्रीय पुनर्वास यूनिवर्सिटी में बने लोकपाल

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। ज्ञानवापी विवाद में फैसला देकर चर्चित हुए जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश को रिटायरमेंट के बाद डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास यूनिवर्सिटी का लोकपाल नियुक्त किया गया है। लखनऊ स्थित इस यूनिवसिर्टी में डॉ विश्वेश स्टूडेंट की शिकायतों का निस्तारण करेंगे। वह गत 31 जनवरी को ही रिटायर हुए थे। लोकपाल पद के लिए नियुक्ति के लिए 10 साल के अनुभव वाले रिटायर्ड जज की योग्यता चाहिए थी। इसके अलावा 10 साल के अनुभव वाले रिटायर्ड प्रोफेसर की भी नियुक्ति इस पद पर की जा सकती है।
डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास यूनिवर्सिटी के मीडिया इन चार्ज प्रोफेसर यशवंत विरोदया ने बताया कि डॉ अजय कृष्ण विश्वेश 29 फरवरी को वाइस चांसलर हिमांशु शेखर झा से मिलने के लिए आए थे। गौरतलब है कि डॉ अजय कृष्ण विश्वेश ने अपने ऐतिहासिक फैसले में व्यास तहखाने (दक्षिणी तहखाना) में स्थित मूर्तियों की पूजा, राग-भोग करने की इजाजत दी है। यह उनका आखिरी फैसला था। 31 जनवरी को इसे सुनाने के बाद वह रिटायर हो गए। अपनी न्यायिक सेवा के आखिरी दिन यह फैसला देकर अजय कृष्ण विश्वेश ने अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया।
मूलरूप से हरिद्वार के रहने वाले
डॉ अजय कृष्ण विश्वेश मूलरूप से हरिद्वार के रहने वाले हैं। उनका जन्म सात जनवरी, 1964 को हुआ था। उन्होंने कुरुक्षेत्र के सीनियर मॉडल स्कूल से 1981 में बीएससी, 1984 में एलएलबी और 1986 में एलएलएम किया। 20 जून, 1990 को उनकी न्यायिक सेवा की शुरुआत हुई। उत्तराखंड के कोटद्वार में उनकी पहली पोस्टिंग मुंसिफ मजिस्ट्रेट के रूप में हुई। 1991 में उनका ट्रांसफर सहारनपुर हो गया। इसके बाद वह देहरादून के न्यायिक मजिस्ट्रेट बने।
34 सालों का अनुभव
1995 में डॉ अजय कृष्ण विश्वेश एडिशनल सिविल जल रहे। 1999 में मेरठ में एसीजेएम के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। जिला जज के रूप में पहली बार उनकी पोस्टिंग वर्ष 2018 में संभल जिले में हुई। फिर वह बदायूं, सीतापुर, बुलंदशहर और वाराणसी में भी जिला जज के रूप में नियुक्त हुए। बनारस में उन्होंने 21 अगस्त, 2022 को कार्यभार ग्रहण किया था। कुल 34 सालों की न्यायिक सेवा के बाद वह 31 जनवरी, 2024 को रिटायर हो गए।




