पांच साल की बच्ची के पैर की दो अंगुलियां हाथ में ट्रांसप्लांट, नौ घंटे तक चली 12 डॉक्टरों की सर्जरी

नई दिल्ली। चारा काटने वाली मशीन में दो साल पहले हाथ की उंगलियां खो चुकी चार साल की मायरा अब लिख सकेगी। सफदरजंग अस्पताल के बर्न एंड प्लास्टिक विभाग के डॉक्टरों ने मायरा के पैर से दो उंगलियां निकालकर दाएं हाथ में लगाईं हैं। हाथों में उंगलियां न होने से मायरा न तो खिलौने से खेल पाती थी और न ही पेंसिल पकड़ पाती थी। यहीं कारण है कि मायरा को माता-पिता ने स्कूल में भर्ती भी नहीं करवाया था।

अस्पताल के अनुसार जनवरी में मायरा के पिता अस्पताल के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉक्टर शलभ कुमार से मिले। डॉ. शलभ ने उन्हें प्रोफेसर राकेश कैन से मिलने के लिए कहा। डॉ. राकेश कैन ने मामले की जांच कर सर्जरी का फैसला लिया और 16 मई को बच्ची की सर्जरी की। करीब नौ घंटे चली सर्जरी के साथ सफल रूप से हाथों में उंगलियों को जोड़ा जा सका। सर्जरी के चार दिन बाद बच्ची एकदम ठीक है और उसकी हाथ की उंगलियां काम कर रही हैं। सर्जरी पर सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ. बीएल शेरवाल ने कहा कि इस प्रकार की सर्जरी से मरीजों में विश्वास आता है। हमारी कोशिश है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं दें।

दो साल बाद चला पता

मायरा के पिता नेतराम का कहना है कि वह अलवर के रहने वाले हैं। दो साल पहले मायरा के हाथ चारा काटने वाली मशीन में आ गए। इससे दोनों हाथों की उंगलियां और अंगूठे कट गए। घटना के बाद उसे एक पास के अस्पताल ले गए, ताकि उंगलियों को सर्जरी से जुड़वाया जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दो साल बाद पता चला कि सफदरजंग अस्पताल के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में उंगलियों की री-कंस्ट्रक्शन सर्जरी होती है। इसकी जानकारी मिलने के बाद जनवरी में वे सफदरजंग के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉक्टर शलभ कुमार से मिले। यहां बच्ची की जांच हुई और उपचार के दौरान सर्जरी का फैसला लिया गया।

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