करोड़ों की ठगी मामले में उत्तराखंड के पूर्व सीएम के बेटे के खिलाफ जांच करेगी आर्थिक अपराध शाखा

गाजियाबाद। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे साकेत बहुगुणा सहित इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड, अन्य कंपनियों के पूर्व और वर्तमान पदाधिकरियों समेत करीब 18 लोगों पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले की जांच अब आर्थिक अपराध शाखा करेगी। इस संबंध में पुलिस ने आर्थिक अपराध शाखा को पत्र लिखा है। जल्द ही आरोपियों से पूछताछ कर जांच आगे बढ़ाए जाने की संभावना है।

इंदिरापुरम के वैभव खंड स्थित शिप्रा मॉल में शिप्रा एस्टेट कंपनी का ऑफिस है। कंपनी के डायरेक्टर अमित वालिया ने इंडिया बुल्स के पूर्व चेयरमैन समीर गहलोत, वाइस चेयरमैन एवं एमडी गगन वांगा, अश्वनि ओमप्रकाश कुमार हुड्डा, राजीव गांधी, जितेश मीर, राकेश भगत, आशीष जैन, साकेत बहुगुणा के अलावा, 3 एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर रूप कुमार बंसल, बसंत बंसल, पंकज बंसल, विवेक सिंघल, अनीता ठाकुर, सौरभ सुनील जैन, मनोज, रविन्द्र सिंह, अजय शर्मा, राजेश चंद्रकांत शाह के खिलाफ थाना इंदिरापुरम में करोड़ों की धोखाधड़ी, मारपीट, धमकी और षड्यंत्र रचने के आरोप में केस दर्ज हुआ था।
शिप्रा एस्टेट कंपनी के डायरेक्टर अमित वालिया का आरोप था कि इंडिया बुल्स कंपनी के डायरेक्टर उनके पास आए और कहा कि वह मार्केट से कम ब्याज दर पर 1939 करोड़ रुपये का लोन दे देंगे। इसके बदले में शिप्रा एस्टेट की 6 हज़ार करोड़ रुपये की 6 संपत्ति गिरवी रखने की शर्त रखी गई। आरोप है कि शर्त तय हो जाने के बाद इंडिया बुल्स कंपनी के डायरेक्टर अपनी बात से मुकर गए। 1939 करोड़ की जगह 866 करोड़ 88 लाख 76 हज़ार रुपये ही खाते में डाले। इसमें से भी मोटी रकम खुद निकाल ली।

यही नहीं, जालसाजी के साथ फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर शिप्रा एस्टेट की संपत्ति हड़पी जाने लगी। इसके बाद कंपनी के गिरवी रखे गए शेयरों को भी कम दामों में बेच दिया। अमित वालिया के मुताबिक, संपत्ति को वापस पाने के एवज में इंडिया बुल्स कंपनी के पदाधिकारियों द्वारा उनसे अब 1738 करोड़ रुपयों की मांग की जा रही है। इस संबंध में स्पीड पोस्ट के माध्यम से थाना इंदिरापुरम में शिकायत भेजी गई थी, जिसके बाद रविवार को कोर्ट के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।डीसीपी विवेक चंद ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है, लेकिन बड़ी रकम के हेरफेर का आरोप है, इसलिए जांच आर्थिक अपराध शाखा को दी गई है।

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