8 साल से केवल दही-चूड़ा खा कर रही थीं गुजारा, बिजली न गैस सिलिंडर, रुला देगी नोएडा की इस बूढ़ी मां की कहानी

ग्रेटर नोएडा। बीटा -1 के जिस मकान में सोमवार को बुजुर्ग महिला का शव मिला था उसमें 8 साल से बिजली कनेक्शन नहीं था। पड़ोसियों के मुताबिक घर में गैस का कनेक्शन भी नहीं था। इतनी परेशानी में रहने के बावजूद वह हमेशा लोगों को जागरूक करती रहती थीं। करीब 4 महीने बाद गाजियाबाद से जब उनके बेटे उनसे मिले आए तब पता चला की उनकी मौत हो चुकी है। पुलिस ने बताया कि शव करीब 20 दिन पुराना है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मौत किस वजह से हुई है उसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
मूलरूप से पटना (बिहार) की रहने वाली अमिया कुमारी (70) बीटा 1 के अपने मकान में अकेली रहती थीं। 60 मीटर में बने ढाई मंजिल के मकान की कीमत 70 से 80 लाख रुपये है। इनके बेटे प्रणव रंजन गाजियाबाद के वैशाली में रहते हैं। सोमवार सुबह प्रणव रंजन अपनी बीवी और सास के साथ मां से मिलने के लिए आए थे। जब उन्होंने घर दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं आया। घर के अंदर से ताला लगा हुआ था और बदबू भी आ रही थी। अनहोनी की आशंका जताते हुए डायल 112 पर कॉल करके पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने घर का दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसी। अंदर देखा कि महिला का शव फर्श पर पड़ा था।

बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि इस मकान बिजली का कनेक्शन मई 2015 से कटा हुआ था। जनवरी 2018 में पूर्ण रूप से कनेक्शन को काट दिया गया था। उन पर 83330 का बिल बकाया था, जो कि लगातार नोटिस के बाद भी जमा नहीं किया गया था। बताया जा रहा है कि 8 साल से महिला घर में अकेले बिना बिजली के रह रही थीं। फर्स्ट फ्लोर में बालकनी में बैठकर हाथ में पंखा लेकर उसको ही हिलाती रहती थीं। एक अन्य पड़ोसी ने बताया कि बुजुर्ग महिला के घर गैस का कनेक्शन नहीं था। वह कुछ पका कर नहीं खाती थीं। हमने कभी पूछा भी नहीं लेकिन लोगों से ही पता चला कि वह दही और चुड़ा ही खाया करती थीं। रोशन के लिए मोमबत्ती घर में रखा करती थीं। जब गर्मी ज्यादा पड़ती थी तब बालकनी में आकर बैठ जाती थीं। एक पड़ोसी ने बताया कि आंटी बहुत अच्छी थीं और अक्सर मुझसे बात किया करती थीं। वह अपने परिवार के बारे में ज्यादा नहीं बात करती थीं। उनके बेटे को मैंने कभी नहीं देखा। मैं पिछले 6 वर्षों से यहां पर रह रही हूं और उनके घर में मैंने कभी लाइट भी जलते हुए नहीं देखी। 60 मीटर में बना ढाई मंजिला मकान जर्जर हो चुका है। मकान के अधिकांश खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं और साफ सफाई नहीं होने के कारण मकान पूरी तरह खंडहर सा लग रहा है। यहां तक कि मकान के सामने बड़े-बड़े पेड़ होने पूरा कवर हो गया है। पेड़ों की छंटाई भी नहीं हुई।

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