कम नहीं हो रही सौम्या चौरसिया की परेशानियां, अब ईडी ने जब्त कि 150 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी

छत्तीसगढ़ डेस्क। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव सौम्या चौरसिया समेत अन्य पांच आरोपियों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने अब पांच आरोपियों की 150 करोड़ से अधिक की 91 संपत्तियों को जब्त कर लिया है। तथा कथित कोयला घोटाला की जांच के दौरान ये एक्शन लिया गया है। इससे पहले इस मामले में विशेष अदालत ने मामले में गिरफ्तार उपसचिव सौम्या चौरसिया की प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत अवधि चार दिनों के लिए बढ़ा दी है। अधिवक्ताओं ने शनिवार को यह जानकारी दी।

चौरसिया के अधिवक्ता फैजल रिजवी ने बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने उनकी मुवक्किल की ईडी हिरासत की अवधि चार दिनों के लिए बढ़ा दी है। वह (चौरसिया) मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में पदस्थ है। ईडी ने इस महीने की दो तारीख को चौरसिया को गिरफ्तार किया था तथा उसे अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उसे चार दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया था। मंगलवार को यह अवधि समाप्त होने पर ईडी ने चौरसिया को अदालत में पेश किया था।

तब उसे आज तक के लिए ईडी हिरासत में भेजा गया था। रिजवी ने बताया कि आज हिरासत अवधि समाप्त होने पर ईडी ने चौरसिया को अदालत में पेश किया तथा छह दिनों की और हिरासत की मांग की जिसका उन्होंने (रिजवी ने) विरोध किया। बाद में अदालत में चौरसिया को चार दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया। अधिवक्ता ने बताया कि चौरसिया को 14 दिसंबर को अदालत में पेश किया जाएगा। मौजूदा कांग्रेस की सरकार में प्रभावशाली अधिकारी माने जाने वाली चौरसिया को ईडी ने पूछताछ के बाद धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दो दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया था। आयकर विभाग की एक शिकायत का संज्ञान लेने के बाद ईडी ने धनशोधन जांच शुरू की थी। ईडी ने अपनी जांच के तहत अक्टूबर में राज्य के कई शहरों में छापेमारी की थी।

इसके बाद आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई, कोयला व्यापारी सूर्यकांत तिवारी, उनके चाचा लक्ष्मीकांत तिवारी और एक अन्य कोयला व्यवसायी सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य में कथित कोयला लेवी घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में शुक्रवार को रायपुर की विशेष अदालत में एक अभियोजन परिवाद पेश किया। इस मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी तथा तीन अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। ईडी ने परिवाद में उल्लेख किया है कि वरिष्ठ अधिकारियों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़े एक कार्टेल के द्वारा राज्य में कोयला परिवहन के लिए 25 रुपये प्रति टन की अवैध उगाही की जा रही थी।

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