23 सितंबर को मनाई जाएगी भुवनेश्वरी जयंती, मां की आराधना से शांति और स्थिरता की कामना
मां भुवनेश्वरी जयंती 23 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, जो 10 महाविद्याओं में चौथी हैं। यह दिन आंतरिक शांति, स्थिरता और संतान सुख के लिए उनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रखता है।

धर्म डेस्क,नई दिल्ली। मां भुवनेश्वरी को दस महाविद्याओं में चौथी महाविद्या माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां भुवनेश्वरी अपने शांत स्वरूप और मातृत्व भाव के लिए जानी जाती हैं तथा उन्हें संपूर्ण सृष्टि की माता के रूप में भी पूजा जाता है। इस वर्ष भुवनेश्वरी जयंती 23 सितंबर 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाए जाने की धार्मिक परंपरा है।
भुवनेश्वरी जयंती के अवसर पर श्रद्धालु मां की पूजा-अर्चना कर जीवन में शांति, स्थिरता, परिवार की खुशहाली, संतान सुख और आंतरिक शक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में मां की आराधना को मन की अशांति, भय और भ्रम को दूर करने तथा धैर्य और सकारात्मक सोच बढ़ाने से जोड़ा गया है। मान्यता है कि शांत और संतुलित मन व्यक्ति को जीवन में बेहतर निर्णय लेने में सहायता करता है।
पूजा की परंपरा के अनुसार भुवनेश्वरी जयंती के दिन श्रद्धालुओं को सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद मां भुवनेश्वरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। यदि मां का चित्र उपलब्ध न हो तो आदिशक्ति या मां दुर्गा के किसी स्वरूप का ध्यान करके भी पूजा करने की परंपरा बताई गई है।
पूजा में लाल और पीले फूल, अक्षत, रोली, कुमकुम, चंदन, धूप-दीप, फल, मिठाई और नारियल आदि अर्पित किए जाते हैं। मां की पूजा से पहले भगवान गणेश का स्मरण करने की परंपरा है। इसके बाद देवी को फल-फूल, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान ‘ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। पूजा के समापन पर मां की आरती कर परिवार में सुख-शांति, संतान की उन्नति और सकारात्मक विचारों के लिए प्रार्थना की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं में इस दिन श्रद्धा और संयम के साथ देवी की आराधना करने पर जोर दिया गया है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों की सहायता भी कर सकते हैं। साथ ही मन में ईर्ष्या, क्रोध और कटुता जैसी भावनाओं से बचने तथा घर में शांत वातावरण बनाए रखने की परंपरा बताई गई है।
भुवनेश्वरी जयंती के दिन झूठ, निंदा, कटु वाणी और अनावश्यक विवाद से दूर रहने की सलाह धार्मिक मान्यताओं में दी गई है। पूजा को केवल दिखावे के बजाय श्रद्धा और सच्ची भावना से करने पर जोर दिया जाता है। इस अवसर पर तामसिक भोजन, नशे और अनुचित व्यवहार से बचने की भी धार्मिक परंपरा बताई गई है।




