डीटीसी निजी चालकों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी, यात्रियों को घंटों करना पड़ा बसों का इंतजार,ऑटो का बढ़ा किराया
डीटीसी और परिवहन विभाग के निजी चालकों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही, जिससे सोमवार को स्कूल-कॉलेज खुलने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ने से दिल्ली की सड़कों पर बसों की भारी कमी महसूस हुई।

नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम और परिवहन विभाग की बसों पर तैनात निजी चालकों की हड़ताल सोमवार को सातवें दिन भी जारी रही। स्कूल-कॉलेज और सरकारी तथा निजी कार्यालय खुलने के कारण सोमवार को सड़कों पर यात्रियों की संख्या बढ़ गई, जिससे कई इलाकों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित रही। यात्रियों को कई मार्गों पर बसों के लिए डेढ़ से दो घंटे तक बस स्टॉप पर इंतजार करना पड़ा।
यात्रियों का कहना है कि बसों की कमी का फायदा उठाकर कई स्थानों पर ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने किराया बढ़ा दिया है। इससे रोजाना बसों से सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण दिल्ली में बसों की कमी का असर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दिया।
डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हड़ताल के बीच कुछ निजी चालक काम पर लौटने लगे हैं। इसके अलावा स्थायी और संविदा चालकों को भी बसें उपलब्ध कराकर विभिन्न मार्गों पर भेजा गया। सोमवार को करीब 50 से 60 प्रतिशत बसों की ही परिचालन के लिए उपलब्धता हो सकी। बस सेवा को सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।
फतेहपुर बेरी और आसपास के गांवों में भी सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण यात्रियों को स्थानीय बस स्टॉप पर घंटों इंतजार करना पड़ा। ग्रामीणों के अनुसार, छतरपुर मेट्रो स्टेशन से फतेहपुर बेरी तक जाने के लिए ई-रिक्शा चालक सामान्य से अधिक किराया मांग रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि जहां पहले ई-रिक्शा का किराया 10 से 20 रुपये के आसपास था, वहीं अब कई जगह 20 से 40 रुपये तक लिया जा रहा है। इसी तरह ऑटो का किराया भी कई मार्गों पर बढ़ गया है।
स्थानीय निवासी मुन्नी लाल ने बताया कि बस सेवा प्रभावित होने के कारण ई-रिक्शा का किराया 10-20 रुपये से बढ़कर 20-40 रुपये तक हो गया है, जबकि ऑटो का किराया कई स्थानों पर लगभग दोगुना हो गया है। यात्रियों ने बस सेवा जल्द सामान्य किए जाने की मांग की है, ताकि उन्हें अतिरिक्त किराये और लंबे इंतजार से राहत मिल सके।




