पूर्ति निरीक्षक बने हिटलर और तानाशाह, राशन की समस्या को लेकर पूर्ति कार्यालय पहुंचे व्यक्ति पर मुकदमा, सीसीटीवी जांच की मांग
राशन की समस्या का समाधान ना होने पर पीड़ित के सहयोग मे पहुंचे ग्रामीण पर पूर्ति निरीक्षक ने सरकारी कार्य में बाधा सहित अनुसूचित जाति का दर्ज कराया मुकदमा

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशाम्बी,उत्तर प्रदेश। मंझनपुर तहसील स्थित पूर्ति विभाग के कार्यालय में राशन से जुड़ी समस्या को लेकर पहुंचे एक व्यक्ति के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, गाली-गलौज करने और अनुसूचित जाति से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। पूर्ति निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, मामले को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने और घटना के समय मौजूद कर्मचारियों तथा अन्य लोगों के बयान दर्ज कराने की मांग उठाई जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आ सके।
पूर्ति निरीक्षक मंझनपुर राम कुंवर आर्य ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि 16 सितंबर 2026 को तहसील परिसर स्थित पूर्ति कार्यालय में बृजेश मिश्रा पुत्र मोहन मिश्रा निवासी सेलरहा पश्चिम, थाना मंझनपुर पहुंचे। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने कार्यालय में मौजूद आवेदकों को हटाने का प्रयास किया और ऊंची आवाज में बात करते हुए सरकारी कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया। आरोप है कि उन्होंने सरकारी दस्तावेज और आवेदन फाड़ने का प्रयास भी किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि समझाने पर संबंधित व्यक्ति ने पूर्ति निरीक्षक और कार्यालय कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज तथा अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
शिकायत के आधार पर मंझनपुर कोतवाली पुलिस ने बृजेश मिश्रा के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और अनुसूचित जाति से संबंधित धाराओं सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की विवेचना सीओ कौशाम्बी सौरभ सामंत को सौंपी है। पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़े तथ्यों, गवाहों के बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। मुकदमे में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर राशन से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए पूर्ति कार्यालय पहुंचा था और उसके साथ गांव का एक व्यक्ति भी गया था। इसी दौरान विवाद की स्थिति बनने और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने का मामला सामने आया। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो घटना के समय की फुटेज की जांच की जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि कार्यालय में उस दिन वास्तव में क्या हुआ था और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों की परिस्थितियां क्या थीं।
मामले को लेकर विभागीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं कि घटना की निष्पक्षता से जांच के लिए कार्यालय में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों और मौके पर मौजूद आवेदकों के बयान लिए गए हैं या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राशन कार्ड, राशन वितरण और अन्य खाद्य आपूर्ति संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए लोग अक्सर पूर्ति कार्यालय का रुख करते हैं। ऐसे में किसी विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों के तथ्यों की जांच के बाद ही कार्रवाई किए जाने से पारदर्शिता बनी रह सकती है।
क्षेत्र में राशन वितरण से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कहीं राशन की तौल में कमी होती है, कहीं राशन कार्ड में त्रुटियों के कारण लाभार्थियों को परेशानी होती है और कुछ पात्र लोगों के राशन कार्ड से संबंधित समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पाता। इन शिकायतों की स्थिति और उनके समाधान की वास्तविकता संबंधित विभागीय अभिलेखों और जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।
इसी तरह घरेलू गैस की आपूर्ति, कथित कालाबाजारी तथा पेट्रोल-डीजल में मिलावट और घटतौली जैसी शिकायतों पर भी प्रभावी कार्रवाई की मांग समय-समय पर उठती रही है। इन मामलों में शिकायतों की जांच और दोष पाए जाने पर कार्रवाई संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो।
फिलहाल मंझनपुर पूर्ति कार्यालय से जुड़े इस मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है तो उसकी जांच, कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। साथ ही विभागीय अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लेकर तथ्यों की स्वतंत्र जांच किए जाने से भी विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है।




