बस के किराये के लिए परेशान छात्रा की आजमगढ़ डीएम ने सुनी फरियाद, एक लाख रुपये की मदद से पढ़ाई को मिली नई उड़ान
आजमगढ़ की मेनका प्रजापति के लिए पिता के निधन के बाद पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया था। बस के किराये के लिए जनता दरबार पहुंची छात्रा की गुहार पर डीएम ने पहले नि:शुल्क MST पास की व्यवस्था कराई।

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। आर्थिक तंगी के चलते प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी छोड़ने की कगार पर पहुंची छात्रा मेनका प्रजापति की छोटी-सी फरियाद पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने त्वरित पहल करते हुए पहले उसके लिए नि:शुल्क बस यात्रा पास की व्यवस्था कराई और सात दिन के भीतर उच्च शिक्षा व किताबों के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई। प्रशासन की इस मदद से छात्रा और उसके परिवार को बड़ी राहत मिली है।
मेनका प्रजापति बूढ़नपुर तहसील क्षेत्र के अतरौलिया इलाके के खानपुर फतेह गांव की रहने वाली हैं। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं और आगे पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं। कुछ समय पहले उनके पिता अमरजीत प्रजापति का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई और मेनका के सामने पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो गया।
मेनका आजमगढ़ शहर में जाकर कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती हैं। रोजाना आने-जाने में लगने वाला बस का किराया भी परिवार के लिए बड़ी आर्थिक परेशानी बन गया। हालात ऐसे हो गए कि आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई रुकने की नौबत आ गई।
इसी बीच मेनका ने जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के जनता दरबार में पहुंचकर अपनी समस्या बताई। उन्होंने बताया कि यदि उन्हें बस का यात्रा पास मिल जाए तो वह नियमित रूप से शहर जाकर अपनी पढ़ाई और कोचिंग जारी रख सकती हैं। छात्रा की परेशानी सुनने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक से संपर्क कर मेनका के लिए नि:शुल्क यात्रा पास उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई। साथ ही उन्होंने छात्रा को भरोसा दिया कि उसकी पढ़ाई में हरसंभव सहायता की जाएगी और आर्थिक परेशानी को उसके लक्ष्य की राह में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
इसके करीब सात दिन बाद मेनका के परिवार को जिलाधिकारी कार्यालय से फोन कर कलेक्ट्रेट बुलाया गया। परिवार के सदस्य जब वहां पहुंचे तो जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने मेनका की आगे की उच्च शिक्षा और किताबों की जरूरतों के लिए उसे एक लाख रुपये का चेक सौंपा। जिलाधिकारी ने छात्रा से कहा कि इस राशि का उपयोग उसकी पढ़ाई से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाए।
एक लाख रुपये की सहायता मिलने के बाद मेनका और उनके परिवार के लिए यह भावुक क्षण था। परिवार के मुताबिक, जब उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय से बुलाए जाने का फोन आया था, तब उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि किस उद्देश्य से बुलाया गया है। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी हुई तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
मेनका की मां सरिता देवी ने जिलाधिकारी की पहल के लिए उनका आभार जताया। परिवार का कहना है कि आर्थिक संकट के बीच प्रशासन की ओर से मिली मदद ने मेनका को अपनी पढ़ाई जारी रखने का भरोसा दिया है। वहीं मेनका का कहना है कि उन्हें इतनी जल्दी मदद मिलने की उम्मीद नहीं थी। अब वह पूरी मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करेंगी।
मेनका की कहानी बताती है कि किसी जरूरतमंद की छोटी-सी समस्या को समय रहते गंभीरता से लिया जाए तो उसका प्रभाव बड़ा हो सकता है। जिस छात्रा के लिए शुरुआत में रोजाना बस का किराया पढ़ाई के रास्ते में बाधा बन रहा था, उसे अब नि:शुल्क यात्रा की सुविधा के साथ उच्च शिक्षा और किताबों के लिए एक लाख रुपये का आर्थिक सहारा भी मिल गया है।




