एक माह से चल रहे श्रीरामचरितमानस पाठ का हुआ समापन, पूर्णाहुति हवन में उमड़े श्रद्धालु
कौशाम्बी के ग्राम ऊनौ स्थित पजौहा नाथ शिव मंदिर में एक माह से चल रहे श्रीरामचरितमानस पाठ का 27 अगस्त को विधि-विधान से समापन हुआ। पूर्णाहुति हवन, विशेष पूजा-पाठ और कन्या पूजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहा। 29 अगस्त को मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं से शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है।

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशाम्बी/उत्तर प्रदेश। विकासखंड सरसवां क्षेत्र के ग्राम ऊनौ स्थित पजौहा नाथ शिव मंदिर में पिछले एक माह से चल रहे श्रीरामचरितमानस पाठ का गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को विधि-विधान और भक्तिमय वातावरण के बीच समापन हुआ। धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन मंदिर परिसर में पूर्णाहुति हवन एवं विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने भाग लिया।
समापन अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कर परिवार तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
एक माह तक चले श्रीरामचरितमानस पाठ के समापन पर भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव एवं श्रीराम से आशीर्वाद मांगा। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
पूर्णाहुति हवन के बाद कन्या पूजन का भी आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ कन्याओं का पूजन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजकों की ओर से धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया गया।
ग्रामवासियों ने बताया कि श्रीरामचरितमानस पाठ के समापन के बाद 29 अगस्त 2026, शनिवार को पजौहा नाथ शिव मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भंडारे में क्षेत्र के ग्रामीणों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जाएगी।
आयोजक समस्त भक्तगण एवं ग्रामवासियों ने क्षेत्रीय जनमानस और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे 29 अगस्त को मंदिर परिसर में आयोजित विशाल भंडारे में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करें और धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें।




