योगी आदित्यनाथ के चहेते ‘मुंशी जी’ यासीन अंसारी गोरखनाथ मंदिर में 49 वर्षों से दे रहे सेवा, धार्मिक सद्भाव की मिसाल बना परिवार
यूपी के गोरखपुर में गोरक्षपीठ और नाथ संप्रदाय के प्रसिद्ध मठ से कई मुस्लिम परिवारों की आजीविका चलती है। यासीन अंसारी पिछले 49 साल से मंदिर में सेवाएं दे रहे हैं। पीठ के महंत और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ उन्हें 'मुंशी जी' कहते हैं।

गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। गोरखनाथ मंदिर केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक सद्भाव की मिसाल के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखता है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में विभिन्न समुदायों के लोग लंबे समय से आपसी सहयोग और सौहार्द के साथ रहते और काम करते हैं। इसी सद्भाव की एक उल्लेखनीय मिसाल यासीन अंसारी हैं, जो वर्ष 1977 से लगातार गोरखनाथ मंदिर से जुड़े हुए हैं और करीब 49 वर्षों से पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
मंदिर परिसर में हिंदू, सिंधी समाज के अलावा मुस्लिम समुदाय के लोगों की भी कई दुकानें हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले प्रसिद्ध खिचड़ी मेले में भी मुस्लिम समाज के दुकानदार बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। यह मेला एक महीने से अधिक समय तक चलता है और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
यासीन अंसारी के अनुसार, उनके परिवार की मंदिर से जुड़ाव की परंपरा पुरानी है। उनके पिता बड़े महंत दिग्विजय नाथ के समय मंदिर के भंडारण और उससे जुड़े लेखा-जोखा का काम देखते थे। बाद में यासीन अंसारी भी मंदिर की सेवा से जुड़ गए। वर्ष 1977 में 22 वर्ष की उम्र में उन्होंने मंदिर में काम शुरू किया।
महंत अवैद्यनाथ के मार्गदर्शन में अंसारी ने मंदिर के कार्यक्रमों के खर्च, चढ़ावे और अन्य वित्तीय कार्यों का लेखा-जोखा संभाला। मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक, उन्होंने कई वर्षों तक यह जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई। वर्ष 1983 के बाद मंदिर का विस्तार होने के साथ उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ीं और उन्होंने निर्माण, मरम्मत तथा अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख शुरू कर दी।
यासीन अंसारी आज भी मंदिर से जुड़े निर्माण और विकास कार्यों की जानकारी प्रबंधन को देते हैं। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखपुर आते हैं तो अंसारी से मंदिर में चल रहे निर्माण और मरम्मत कार्यों का ब्यौरा लेते हैं। मंदिर परिसर में लोग उन्हें स्नेह से ‘चाचा’ कहते हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ उन्हें ‘मुंशी जी’ कहकर संबोधित करते हैं।
अंसारी के परिवार की अगली पीढ़ी भी गोरखनाथ मंदिर से जुड़े संस्थानों में सेवाएं दे रही है। उनके बेटे मोहम्मद सलीम अंसारी गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय में फिजियोथैरेपिस्ट के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनके दूसरे बेटे का मेडिकल स्टोर बताया जाता है। इस तरह परिवार की तीसरी पीढ़ी तक मंदिर से जुड़ाव बना हुआ है।
गोरखनाथ मंदिर के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों और जुलूसों के दौरान भी क्षेत्र में आपसी सौहार्द देखने को मिलता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, मंदिर के आसपास मुस्लिम आबादी वाले कई मोहल्ले हैं और धार्मिक आयोजनों के दौरान दोनों समुदायों के बीच सहयोग एवं सहभागिता देखने को मिलती है।
यासीन अंसारी ने कहा कि उनके लिए सेवा ही सबसे महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि बड़े महंत अवैद्यनाथ उन्हें ‘मौलाना’ कहकर बुलाते थे, जबकि योगी आदित्यनाथ उन्हें ‘मुंशी जी’ कहते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर से उन्हें हमेशा स्नेह और सम्मान मिला है तथा उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से किया है।
धर्म के सवाल पर अंसारी ने कहा कि उनके लिए अल्लाह और ईश्वर में कोई भेद नहीं है। उनका कहना है कि इबादत चाहे अल्लाह के घर में हो या भगवान के मंदिर में, वह ऊपर वाले को समान रूप से याद करते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक जीवन है, वह मंदिर की सेवा करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार पर बाबा गुरु गोरखनाथ और अल्लाह दोनों की कृपा है। उनका मानना है कि इंसानियत और सेवा सबसे ऊपर है। गोरखनाथ मंदिर से अंसारी परिवार का लगभग पांच दशक से चला आ रहा जुड़ाव धार्मिक सद्भाव, विश्वास और सामाजिक समरसता की एक उल्लेखनीय मिसाल के रूप में सामने आता है।




