Maharashtra News : बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे बने महाराष्ट्र के नए लोकायुक्त
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के पूर्व जज, जस्टिस सुनील बालकृष्ण शुक्रे ने महाराष्ट्र लोकायुक्त के चेयरमैन के तौर पर शपथ ली। उन्होंने राज्य की वैधानिक भ्रष्टाचार-रोधी संस्था (ओम्बड्समैन) का कार्यभार संभाला। उनका कार्यकाल पांच साल का होगा या 70 साल की उम्र पूरी होने तक इनमें से जो भी पहले हो।

कांती जाधव/महाराष्ट्र स्टेट हेड
मुंबई ब्यूरो। बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे ने बुधवार को महाराष्ट्र के नए लोकायुक्त के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। मुंबई स्थित राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने न्यायमूर्ति शुक्रे को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी।
शपथ ग्रहण समारोह से पहले राज्यपाल के सचिव प्रशांत नारनवारे ने न्यायमूर्ति शुक्रे की लोकायुक्त के रूप में नियुक्ति संबंधी अधिसूचना पढ़कर सुनाई। समारोह की शुरुआत वंदे मातरम, राष्ट्रगान और महाराष्ट्र के राज्य गीत के साथ हुई। कार्यक्रम का समापन भी वंदे मातरम और राष्ट्रगान के साथ किया गया।
न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे अक्टूबर 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद दिसंबर 2023 में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आनंद निरगुडे के इस्तीफे के बाद आयोग की जिम्मेदारी संभाली थी।
पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति शुक्रे ने राज्यभर में व्यापक सर्वेक्षण का नेतृत्व किया। आयोग ने मराठा समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन से संबंधित आंकड़े जुटाए। फरवरी 2024 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून पारित किया था।
मराठा आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच न्यायमूर्ति शुक्रे की आयोग के अध्यक्ष के रूप में भूमिका महत्वपूर्ण रही। आयोग को मराठा समुदाय के पिछड़ेपन से संबंधित अनुभवजन्य आंकड़े जुटाने और उसके आधार पर सरकार को रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान कार्यकर्ता मनोज जरांगे के अनशन को समाप्त कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में भी न्यायमूर्ति शुक्रे शामिल थे। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे के नौ दिन के अनशन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उनसे बातचीत की थी। इस दौरान न्यायमूर्ति शुक्रे सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी बने थे।
न्यायमूर्ति शुक्रे के पास न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों का व्यापक अनुभव है। उन्होंने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान कोल्हापुर और नागपुर में प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में रजिस्ट्रार प्रशासन के पद पर भी कार्य किया। वर्ष 2013 में उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। अक्टूबर 2023 में वह न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए।
न्यायमूर्ति शुक्रे की खेलों में भी रुचि रही है। उन्होंने अपने महाविद्यालयीन दिनों में जलगांव के एमजे कॉलेज का प्रतिनिधित्व करते हुए लॉन टेनिस और बैडमिंटन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था।
लोकायुक्त के रूप में उनकी नियुक्ति से महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार विरोधी संस्थान को न्यायिक अनुभव रखने वाला नेतृत्व मिला है। सेवानिवृत्ति के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके न्यायमूर्ति शुक्रे के सामने अब लोकायुक्त संस्था के माध्यम से भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों और प्रशासनिक अनियमितताओं की निगरानी की अहम जिम्मेदारी होगी।




