फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर गरीबों के इलाज की योजना में सेंध, पांच गिरफ्तार

बरेली में गरीबों के मुफ्त इलाज की सरकारी योजना आयुष्मान भारत को ही ठगी और कमाई का जरिया बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। भोजीपुरा पुलिस ने ऐसे गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो अपात्र लोगों से हजारों रुपये लेकर आधार और राशन कार्ड में हेरफेर के जरिए फर्जी आयुष्मान कार्ड तैयार कराते थे।

बरेली/उत्तर प्रदेश। गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने वाली आयुष्मान भारत योजना का कथित रूप से दुरुपयोग कर कमाई करने वाले गिरोह का भोजीपुरा पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से फर्जी आयुष्मान, आधार और राशन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह अपात्र लोगों से हजारों रुपये लेकर उनके दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर आयुष्मान कार्ड तैयार कराता था।
एसपी उत्तरी मुकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि गिरोह के सदस्य अपात्र लोगों से करीब 35 से 40 हजार रुपये तक वसूलते थे। आधार और राशन कार्ड में नाम-पते से छेड़छाड़ के बाद आयुष्मान कार्ड तैयार कराया जाता था, जिसके जरिए पात्रता का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाता था। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के इलाज का लाभ दिलाने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा नवाबगंज क्षेत्र निवासी हरप्रसाद की शिकायत के बाद हुआ। हरप्रसाद अपनी बेटी के इलाज के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स पहुंचे थे। आरोप है कि आबिद और उसके साथियों ने उनसे 47 हजार रुपये लेकर उनके तथा उनकी बेटी के आधार कार्ड में कथित हेरफेर कर आयुष्मान कार्ड तैयार कराया था। अस्पताल पहुंचने पर कार्ड की वास्तविकता सामने आने के बाद इलाज नहीं हो सका। रुपये वापस मांगने पर कथित तौर पर उन्हें टाल दिया गया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह अपात्र लोगों से आधार और राशन कार्ड लेकर उनमें कथित तौर पर फर्जी नाम-पते दर्ज कराता था। इसके बाद आयुष्मान कार्ड तैयार किए जाते थे। पुलिस का कहना है कि इन कार्डों के माध्यम से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, कथित खेल केवल फर्जी कार्ड बनाने तक सीमित नहीं था। अपात्र लोगों से कार्ड बनवाने के नाम पर रकम लेने के साथ ही आयुष्मान योजना के तहत सरकारी भुगतान हासिल करने की भी कोशिश की जाती थी। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में संगठित अपराध से संबंधित बीएनएस की धारा 111 भी बढ़ाई है।
जांच में निजी अस्पतालों के कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका भी सामने आई है। एफआईआर में अस्पताल कर्मचारी नितिन, नरेश सहित कुछ अज्ञात लोगों का उल्लेख किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में अस्पताल कर्मचारियों की कथित मदद से अपात्र लोगों का इलाज कराने की बात सामने आने का पुलिस ने दावा किया है। हालांकि संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पूछताछ में आरोपितों ने मुरादाबाद निवासी नरेश नामक व्यक्ति का भी जिक्र किया है, जिसके संभल सीएमओ कार्यालय से जुड़े होने का दावा किया गया है। पुलिस अब आरोपितों द्वारा दी गई जानकारी की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य मोबाइल फोन, ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आधार, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करते थे। इसके बाद दस्तावेजों का प्रिंट निकाल लिया जाता था। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी जांच के बाद कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस ने बताया कि बुधवार सुबह सूचना मिलने पर एसआरएमएस कॉलेज भोजीपुरा अस्पताल के पीछे प्रहलादपुर जाने वाले रास्ते पर ट्यूबवेल के पास दबिश दी गई। पुलिस के अनुसार, वहां कुछ लोग आयुष्मान कार्ड बनवाने के संबंध में बातचीत के लिए आने वाले थे। सुबह करीब 7:58 बजे की गई कार्रवाई में आबिद, सलमान, अरमान, अफरोज और देशरत्न को गिरफ्तार किया गया।
तलाशी के दौरान पुलिस ने सात मोबाइल फोन, 13 कथित फर्जी आयुष्मान कार्ड, छह कूटरचित आधार कार्ड, राशन कार्ड की 22 कूटरचित छायाप्रतियां और 2,700 रुपये नकद बरामद किए। आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गिरोह ने अब तक कितने अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड तैयार किए, उनसे कितनी रकम वसूली गई और किन-किन अस्पतालों में इन कार्डों के आधार पर इलाज कराया गया। साथ ही आयुष्मान योजना के तहत सरकारी धनराशि के कथित दुरुपयोग की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपित आबिद का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ वर्ष 2021 में प्रेमनगर थाने में चोरी, बरामदगी और धोखाधड़ी से संबंधित मुकदमा तथा वर्ष 2022 में भोजीपुरा थाने में आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज बताया गया है। मौजूदा मामले को मिलाकर उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में तीन मुकदमे दर्ज हैं।

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