जिन्ना की बीमारी गुप्त रखने वाले दो भारतीय चिकित्सकों को मिलेगा पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
मुंबई के पारसी समुदाय से थे दोनों डॉक्टर, मरणोपरांत ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से किए जाएंगे सम्मानित

इस्लामाबाद/एजेंसी। पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की गंभीर बीमारी की जानकारी गोपनीय रखने वाले मुंबई के दो भारतीय चिकित्सकों को पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। पाकिस्तान की पुरस्कार समिति के प्रमुख और योजना, विकास एवं विशेष पहल मंत्री अहसान इकबाल ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर असैन्य एवं सैन्य पुरस्कारों के लिए चयनित नामों की घोषणा करते हुए यह जानकारी दी।
अहसान इकबाल के अनुसार, सम्मान के लिए चुने गए दोनों चिकित्सक मुंबई निवासी और पारसी समुदाय से संबंधित थे। उन्होंने जिन्ना के गंभीर रूप से बीमार होने की जानकारी को पूरी गोपनीयता के साथ रखा था। पाकिस्तान सरकार के अनुसार, उस दौर में जिन्ना की बीमारी की जानकारी सार्वजनिक होने से भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन की राजनीतिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता था।
इकबाल ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में दोनों चिकित्सकों को एक फिजिशियन और एक रेडियोलॉजिस्ट बताते हुए कहा कि उन्होंने जिन्ना की बीमारी से संबंधित संवेदनशील जानकारी को पूरी ईमानदारी के साथ गोपनीय रखा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों चिकित्सकों के नाम डॉ. जल रतनजी पटेल और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जल धायभो-कू बताए गए हैं। दोनों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया जाएगा।
पाकिस्तानी मंत्री ने जिन्ना की बीमारी की गोपनीयता को 20वीं सदी के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक रहस्यों में से एक बताया। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने बाद में स्वीकार किया था कि यदि उन्हें जिन्ना की गंभीर बीमारी की वास्तविक स्थिति की जानकारी होती, तो संभव है कि भारत के विभाजन को टालने के प्रयास किए जाते।
इकबाल के मुताबिक, जिन्ना के स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति सामने आने पर राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा बदल सकती थी और इसका प्रभाव पाकिस्तान के गठन पर भी पड़ सकता था। इसी कारण दोनों चिकित्सकों द्वारा बीमारी की जानकारी गोपनीय रखने को पाकिस्तान में विशेष महत्व दिया जा रहा है।
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मुहम्मद अली जिन्ना तपेदिक (टीबी) से पीड़ित थे। उस समय यह गंभीर और घातक बीमारी मानी जाती थी। जिन्ना ने अपनी बीमारी की जानकारी सार्वजनिक न होने देने के लिए चिकित्सकीय गोपनीयता बनाए रखने पर जोर दिया था। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के लगभग एक वर्ष बाद सितंबर 1948 में 71 वर्ष की आयु में जिन्ना का निधन हो गया था।
पाकिस्तान में असैन्य और सैन्य पुरस्कारों के लिए चयनित लोगों के नाम आमतौर पर स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को घोषित किए जाते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा पाकिस्तान दिवस के अवसर पर 23 मार्च को आयोजित समारोह में चयनित लोगों को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाता है। मरणोपरांत सम्मान की स्थिति में संबंधित चिकित्सकों के परिजनों या अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा पुरस्कार ग्रहण किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
इस घोषणा के साथ भारत के दो चिकित्सकों का नाम पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल होने की चर्चा भी तेज हो गई है। जिन्ना के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को गोपनीय रखने की भूमिका को पाकिस्तान सरकार ने ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हुए दोनों चिकित्सकों को यह सम्मान देने का निर्णय लिया है।




