आर्थिक तंगी से जूझ रही हिमाचल सरकार आईएएस-आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की संख्या घटाने की तैयारी में
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कहा कि राज्य में IAS, IPS और IFS अधिकारियों के स्वीकृत पदों में कटौती कर सरकार हर साल करीब 200 करोड़ रुपये तक की बचत कर सकती है। सरकार का कहना है कि इस बचत का इस्तेमाल प्रदेश के लोगों के कल्याण और विकास कार्यों में किया जाएगा।

शिमला/एजेंसी। आर्थिक तंगी से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक खर्च कम करने की दिशा में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के स्वीकृत कैडर में कटौती करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान जरूरत के मुकाबले अधिकारियों की संख्या अधिक है। कैडर में कमी से सरकार को हर वर्ष करीब 200 करोड़ रुपये तक की बचत होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में आईएएस अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 153 से घटाकर 130 करने का अनुरोध किया जाएगा। इसी तरह आईएफएस कैडर को 118 से घटाकर 83 करने का प्रस्ताव है। वहीं आईपीएस के मौजूदा 96 स्वीकृत पदों में भी कमी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आवश्यकता के अनुरूप अधिकारियों की संख्या निर्धारित करना जरूरी है और इस कदम को हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ प्रचार करने में अधिक सक्रिय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के कामकाज को लेकर अलग तस्वीर पेश करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भाजपा के कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए श्वेतपत्र भी ला रही है।
कैबिनेट विस्तार के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा हो चुकी है। करीब 15 मिनट तक हुई चर्चा के बाद अब दूसरे दौर की बातचीत होनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीर्ष नेतृत्व के साथ अगली चर्चा के बाद मंत्रिमंडल विस्तार जल्द किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आगामी मानसून सत्र को लेकर कहा कि सरकार ने 10 दिन का सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। यदि विपक्ष सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग करता है तो सरकार उस पर भी विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को लोकतंत्र में विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन उसे सरकार का पक्ष भी सुनना चाहिए। सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्य सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
सुक्खू ने विपक्ष पर सदन में नारेबाजी और वॉकआउट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा में जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल विरोध करने के बजाय मुद्दों पर तथ्यात्मक बहस हो तो सरकार भी उसका जवाब देने के लिए तैयार है।
भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उनके शासनकाल में पेपर लीक नहीं होने दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक करने में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।




