डीजेबी टेंडर अनियमितता मामले में सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपित न्यायिक हिरासत में भेजे गए तिहाड़ जेल
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने से इनकार कर दिया और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के अपग्रेडेशन और क्षमता विस्तार से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने बुधवार को पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और डीजेबी के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय समेत पांच आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, डीजेबी के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी। एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने इस मामले में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने अदालत से पांच आरोपितों की 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की थी, जबकि अंकित श्रीवास्तव की पुलिस हिरासत मांगी गई।
एसीबी का आरोप है कि डीजेबी के एसटीपी के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने से जुड़े टेंडर में शर्तों के साथ कथित तौर पर हेरफेर किया गया। एजेंसी ने आपराधिक साजिश और संदिग्ध रिश्वत भुगतान समेत कई आरोपों के आधार पर जांच शुरू की है।
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से पेश अधिवक्ता ने उनकी गिरफ्तारी पर सवाल उठाया। बचाव पक्ष ने कहा कि इस मामले में एफआईआर मई 2024 में दर्ज हुई थी, जबकि सत्येंद्र जैन को पहली बार पांच अगस्त 2026 को पूछताछ के लिए बुलाया गया और इसके बाद मंगलवार को फोन कर बुलाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अधिवक्ता ने दावा किया कि गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि जैन की ओर से जमानत याचिका भी दाखिल की जाएगी।
उदित प्रकाश राय के अधिवक्ता ने भी गिरफ्तारी का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। अन्य आरोपितों के अधिवक्ताओं ने भी गिरफ्तारी के आधार और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने-अपने पक्ष रखे।
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन ने परियोजना के तकनीकी पहलुओं से खुद को अलग बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना से संबंधित तकनीकी निर्णय अधिकारियों और विशेषज्ञों पर निर्भर थे। उनके अनुसार, परियोजना का मुख्य उद्देश्य यमुना की सफाई था। नए एसटीपी तैयार करने में चार से पांच वर्ष लगने की संभावना को देखते हुए मौजूदा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।
जैन ने अदालत में बताया कि शुरुआती योजना प्रतिदिन 300 मिलियन गैलन (एमजीडी) पानी के शोधन की थी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब पांच करोड़ रुपये प्रति एमजीडी थी। बाद में टेंडर को चार पैकेज में विभाजित किया गया, जिनकी कुल अनुमानित बोली करीब 1,500 करोड़ रुपये बताई गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें टेंडर प्रक्रिया की तकनीकी जानकारी नहीं थी और प्री-बिड बैठक के दौरान वह जेल में थे। जैन ने जांच एजेंसी पर उन्हें मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी बड़े नाम को मामले में जोड़ने की कोशिश के दौरान उनका नाम भी शामिल किया गया।
यह मामला दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर मई 2024 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। इसमें एसटीपी के विस्तार और अपग्रेडेशन से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितता, टेंडर की शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन इससे पहले मई 2022 में गिरफ्तार हुए थे। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से मई 2023 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी। मार्च 2024 में अंतरिम जमानत की याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया था। बाद में राउज एवेन्यू कोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद वह 18 अक्टूबर 2024 को जेल से बाहर आए थे।




