अटल जी का जीवन राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों की मिसाल,अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर बोले सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1996-98 के दौर में राजनीतिक अस्थिरता के बीच अटल जी ने राजनीतिक समन्वय का उदाहरण पेश करते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का निर्माण किया।

लखनऊ/उत्तर प्रदेश। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में उनकी प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उनके छह दशक लंबे सार्वजनिक जीवन को राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक समन्वय की मिसाल बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का सार्वजनिक जीवन निर्विवाद और निष्कलंक रहा। उन्होंने सत्ता और संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन हर भूमिका में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। जरूरत पड़ने पर उन्होंने दल से ऊपर देश को महत्व दिया। यही कारण है कि अटल जी को भारतीय राजनीति का ‘अजातशत्रु’ कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में कश्मीर में धारा-370 के विरोध से शुरू हुआ अटल जी का राजनीतिक सफर सांसद, विदेश मंत्री, नेता प्रतिपक्ष, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री तक पहुंचा। पद और जिम्मेदारियां बदलती रहीं, लेकिन राष्ट्रहित उनके लिए हमेशा सर्वोपरि रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान अटल जी ने लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं 1962, 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान उन्होंने एक जिम्मेदार सांसद के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े होकर राष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत किया। उन्होंने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए भी देशहित को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1996 से 1998 के बीच राजनीतिक अस्थिरता के दौर में अटल जी ने विभिन्न दलों को साथ लेकर राजनीतिक समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी भावना के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का गठन हुआ। उन्होंने कहा कि आज भी एनडीए उसी राजनीतिक समन्वय और सहयोग की भावना के साथ देश तथा विभिन्न राज्यों में सरकार चला रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी व्यक्तित्व से जितने सहज और सरल थे, अपने संकल्पों के प्रति उतने ही दृढ़ थे। करगिल संघर्ष के दौरान उनके नेतृत्व ने देश को निर्णायक संकल्प और आत्मविश्वास दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया की किसी भी शक्ति के दबाव में आए बिना परमाणु शक्ति के रूप में अपनी क्षमता को स्थापित करने का साहसिक निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि अटल जी की राजनीति में राष्ट्रवाद के साथ लोकतांत्रिक मर्यादा, संवाद और सहमति का विशेष महत्व था। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सार्वजनिक जीवन में रहते हुए उन्होंने जिस प्रकार राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया, वह आज भी राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए मार्गदर्शक है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह ओलख, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सदस्य बृजलाल, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य अवनीश सिंह, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने भी अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।





