इंदिरा गांधी के हत्यारे केहर सिंह का बेटा लड़ेगा चुनाव, जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी ने बनाया कैंडिडेट
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे ने बड़ा दांव खेलते हुए इंदिरा गांधी हत्याकांड के दोषी केहर सिंह के बेटे को बस्सी पठाना से उम्मीदवार बनाया है।

चंडीगढ़/एजेंसी। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘वारिस पंजाब दे’ ने अपने चुनावी अभियान को आगे बढ़ाते हुए पहली विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी ने फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से 61 वर्षीय सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। सतवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में दोषी ठहराए गए केहर सिंह के बेटे हैं। यह सतवंत सिंह का पहला विधानसभा चुनाव होगा।
उम्मीदवार के नाम की घोषणा अमृतसर में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘वारिस पंजाब दे’ के कार्यकारी अध्यक्ष तरसेम सिंह और फरीदकोट के सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने की। इस दौरान पार्टी की ओर से कहा गया कि चुनाव में उसका उद्देश्य केवल राजनीतिक सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि पंथिक सिद्धांतों, पंजाब के अधिकारों और समुदाय के लिए योगदान देने वाले परिवारों के सम्मान को राजनीतिक मंच पर स्थान देना भी है।
तरसेम सिंह ने कहा कि पार्टी पर हाल में यह आरोप लगाए जा रहे थे कि वह पुरानी कुर्बानियों से जुड़े परिवारों से दूरी बना रही है। सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने को उन्होंने इन आरोपों का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों के योगदान को केवल सार्वजनिक बयानों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उनके सदस्यों को संगठन में जिम्मेदारियां भी दी जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि संगठन को मजबूत करने के अभियान के तहत सतवंत सिंह के भतीजे सुखविंदर सिंह अगवान को पार्टी के संसदीय बोर्ड में भी शामिल किया गया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठन में पुराने पंथिक परिवारों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम बताया।
सतवंत सिंह की पृष्ठभूमि की बात करें तो वह फतेहगढ़ साहिब जिले के बस्सी पठाना क्षेत्र के मुस्तफाबाद गांव के रहने वाले हैं और सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी हैं। अब वह इसी क्षेत्र से विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक पारी शुरू करेंगे।
केहर सिंह को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में दोषी ठहराया गया था और बाद में उन्हें फांसी दी गई थी। उनके बेटे सतवंत सिंह को बस्सी पठाना से उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले ने पंजाब की चुनावी राजनीति में इस सीट को चर्चा में ला दिया है।
‘वारिस पंजाब दे’ के इस ऐलान के साथ पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी दिशा का पहला संकेत भी दे दिया है। पार्टी नेतृत्व ने अपने राजनीतिक एजेंडे में पंथिक मुद्दों, पंजाब के अधिकारों और उन परिवारों के सम्मान को प्रमुखता देने की बात कही है, जिनका संबंध सिख समुदाय के इतिहास में चर्चित घटनाओं और कुर्बानियों से रहा है।




