कौशांबी में दलित परिवार से मारपीट पर भड़कीं प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान, पुलिस अफसरों को लगाई फटकार
कौशांंबी में बैल मांगकर ले जाने के बाद गायब हो गया। शिकायत करने गए दलित के साथ मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी गई। मामले के तूल पकड़ने पर प्रभारी मंत्री ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।

कौशाम्बी/उतर प्रदेश। सैनी कोतवाली क्षेत्र के गडेरियन का पूरा गांव में चार दिन पहले दलित परिवार के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस कार्रवाई न होने की जानकारी पर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान ने नाराजगी जताई। मंगलवार देर रात वह दलबल के साथ पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं और मामले की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर जमकर फटकार लगाई और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, मामला बैल को लेकर शुरू हुआ था। गडेरियन का पूरा निवासी केसई सरोज का आरोप है कि छह अगस्त को वह खेत में अपना बैल चरा रहा था। इसी दौरान परास गांव निवासी शंकर लाल किसी काम के लिए उससे बैल मांगकर ले गया। दो दिन बाद आठ अगस्त तक बैल वापस नहीं आया तो केसई सरोज अपने छोटे बेटे छविलाल, भांजे अमन और भतीजे अशोक के साथ बैल लेने पहुंचे।
आरोप है कि वहां मौजूद एहसान उस्मानी और गुफरान ने उन्हें गाली-गलौज करते हुए वापस जाने को कहा। विरोध करने पर दोनों ने कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और लाठी-डंडों से मारपीट शुरू कर दी। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें धमकी भी दी गई कि शिकायत करने पर स्कॉर्पियो से कुचलकर मार दिया जाएगा।
घटना के दौरान किसी व्यक्ति ने मारपीट का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की शिकायत लेकर थाने पहुंचने पर उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और आरोपियों के खिलाफ केवल शांतिभंग की कार्रवाई कर उन्हें छोड़ दिया गया।
वायरल वीडियो की जानकारी मिलने के बाद प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान ने मामले को गंभीरता से लिया। मंगलवार रात करीब नौ बजे वह अधिकारियों और समर्थकों के साथ पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। उन्होंने परिवार से घटना की जानकारी लेने के बाद मोबाइल फोन से पुलिस अधीक्षक से बात की और घटना के बाद मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर नाराजगी जताई।
प्रभारी मंत्री ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित परिवार के साथ मारपीट की शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने चौकी प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताते हुए उसके निलंबन की बात कही।
सीओ सतेन्द्र तिवारी से कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि वह अब तक की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है। मंत्री ने बैल लेकर जाने वाले शंकर लाल के साथ ही एहसान उस्मानी और गुफरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में भी हलचल बढ़ गई है। मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर पुलिस अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।




