तमिलनाडु में किसानों का अनोखा प्रदर्शन, नदी किनारे रेत में खुद को दबाया; कावेरी का पानी छोड़ने की मांग
तमिलनाडु के किसानों ने तिरुचिरापल्ली में कावेरी नदी के किनारे रेत में खुद को दबाकर पानी छोड़ने की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया।

चेन्नई/एजेंसी। कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु में किसानों का आक्रोश एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। तिरुचिरापल्ली में कावेरी नदी के किनारे किसानों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए रेत में खुद को दबा लिया और सिंचाई के लिए तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग उठाई।
किसानों का यह प्रदर्शन किसान नेता अय्या कन्नू के नेतृत्व में हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कुरुवई फसल को बचाने के लिए बार-बार अपील के बावजूद कर्नाटक सरकार तमिलनाडु के हिस्से का पानी नहीं छोड़ रही है। कन्नू ने आरोप लगाया कि कर्नाटक तमिलनाडु को उसका वैधानिक हिस्सा देने के बजाय केवल बचा हुआ पानी जारी कर रहा है।
इस बीच, तमिलनाडु सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का पानी तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।
अय्या कन्नू ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह कर्नाटक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 1 लाख करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर्नाटक को हर महीने तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दे चुका है, बावजूद इसके आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। कन्नू के अनुसार, वर्तमान में कर्नाटक के जलाशयों में 80 टीएमसी से अधिक पानी उपलब्ध है।
उन्होंने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 3,500 क्यूसेक पानी देने से इनकार किया गया, जबकि हालिया बारिश का पानी तमिलनाडु के जलाशयों तक पहुंचाया जा सकता था। कन्नू ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते पानी नहीं छोड़ा गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के राज्य सचिव विनोज पी. सेल्वम ने तमिलनाडु सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार डेल्टा क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्या के समाधान के बजाय अन्य गतिविधियों में व्यस्त है, जबकि किसानों को तत्काल पानी की जरूरत है।
किसानों ने मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वॉयर परियोजना का भी विरोध दोहराया। उनका कहना है कि इस परियोजना के बनने से तमिलनाडु में पानी की उपलब्धता और घट जाएगी।
गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना मुद्दा है। कम वर्षा वाले वर्षों में पानी के बंटवारे को लेकर यह विवाद और गहराता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद हर वर्ष मानसून के दौरान यह मुद्दा फिर उभरकर सामने आ जाता है।




