भूमिधरी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का आरोप, न्याय के लिए भटक रहा गरीब किसान

ग्राम पौली में एक गरीब किसान नजीमुद्दीन ने अपनी भूमिधरी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। कई शिकायतों के बावजूद जमीन की पैमाइश नहीं होने और कार्रवाई न होने से वह परेशान है। पीड़ित का कहना है कि उसकी जमीन पर जबरन निर्माण किया जा रहा है, जिससे उसकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

संवाददाता/सत्येंद्र शुक्ला

फतेहपुर/उत्तर प्रदेश। खखरेरू थाना क्षेत्र के ग्राम पौली में भूमिधरी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गांव निवासी नजीमुद्दीन ने उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि उसकी भूमि पर कुछ लोगों द्वारा जबरन कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जबकि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक न तो पैमाइश कराई गई और न ही विवाद का समाधान हुआ।
पीड़ित के अनुसार, भूमि संख्या 1090, रकबा 0.06 हेक्टेयर उसके नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, जिस पर वह वर्षों से खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता आ रहा है। उसने बताया कि यह जमीन उसके परिवार की आय का एकमात्र साधन है।
शिकायत में कहा गया है कि संबंधित भूमि के पास मुस्लिम कब्रिस्तान और चक रोड संख्या 1104 व 1093 स्थित हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों ने कथित रूप से जमीन पर कब्जा करने की नीयत से निर्माण कार्य शुरू कर दिया। नजीमुद्दीन ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान के इशारे पर यह सब किया जा रहा है।
पीड़ित का कहना है कि विरोध करने पर उसकी बात सुनने के बजाय उसे ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उसने बताया कि पहले राजस्व विभाग में शिकायत की, फिर सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन लेखपाल अब तक मौके पर पहुंचकर पैमाइश नहीं कर सका। नजीमुद्दीन के अनुसार, यदि समय रहते सीमांकन कर दिया जाता तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। विभागीय लापरवाही के कारण ही कथित कब्जाधारियों के हौसले बढ़े हैं। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके खिलाफ झूठी शिकायतें कर पुलिस को बुलाया गया, जिससे उसका परिवार भय के माहौल में जी रहा है।
मामले में सुखीलाल पुत्र छबिनाथ ने भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने किसी प्रकार का कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया और उनके नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है। पीड़ित ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि राजस्व टीम को तत्काल मौके पर भेजकर जमीन का सीमांकन कराया जाए और यदि अवैध कब्जा पाया जाए तो उसे हटवाया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में बढ़ते भूमि विवादों का समय पर निस्तारण न होने से सामाजिक तनाव पैदा हो रहा है। उनका मानना है कि यदि राजस्व विभाग समय पर पैमाइश और सीमांकन कराए तो ऐसे अधिकांश विवाद समाप्त हो सकते हैं।
फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग कितनी शीघ्रता से मौके पर पहुंचकर जांच करता है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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