महिला सुरक्षा पर फोकस: पश्चिम बंगाल में ‘दुर्गा सुरक्षा दस्ता’ लॉन्च, सभी थानों में साइबर सहायता डेस्क शुरू

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर शुभेन्दु अधिकारी एक्शन मोड में हैं। सरकार एक तरफ जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आगे बढ़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ सीएम ने गुरुवार को महिला सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी पहल की। उन्होंने 500 स्थानों में हेल्प डेस्क की शुरुआत के साथ दुर्गा सुरक्षा दस्ते का उद्घाटन किया। यह विशेष दस्ता महिला सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।

कोलकाता/एजेंसी। पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने ‘दुर्गा सुरक्षा दस्ता’ का शुभारंभ किया है। इसके साथ ही साइबर अपराधों से निपटने के लिए राज्य के सभी थानों में साइबर सहायता डेस्क की स्थापना भी की गई है। राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को इन पहलों का उद्घाटन करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति सरकार की ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ते हुए एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं। इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी थानों में साइबर सहायता डेस्क स्थापित किए गए हैं और पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘दुर्गा सुरक्षा दस्ता’ एक विशेष पुलिस बल है, जो पूरी तरह महिला पुलिसकर्मियों द्वारा संचालित होगा। इस दस्ते का उद्देश्य राज्य में महिलाओं को चौबीसों घंटे सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। दुर्गा दस्ता के तहत प्रत्येक पुलिस थाने में समर्पित महिला हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी, जिससे महिलाएं बिना किसी संकोच के अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी। यह दस्ता सीमावर्ती क्षेत्रों सहित अन्य संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
इस विशेष दस्ते के लिए महिला पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये कर्मी पिंक यूनिफॉर्म में बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर चौबीसों घंटे गश्त करेंगी। उनकी तैनाती स्कूलों, मंदिरों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर विशेष रूप से की जाएगी, ताकि महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और अन्य अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में कुल 23 जिले हैं, जिन्हें प्रशासनिक दृष्टि से पांच प्रभागों—प्रेसिडेंसी, बर्धमान, मेदिनीपुर, मालदा और जलपाईगुड़ी—में विभाजित किया गया है। सरकार का मानना है कि इन नई पहलों से राज्य में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।

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