कौशाम्बी में लेखपाल प्रकरण पर उठे सवाल: कार्रवाई होगी या लीपापोती?
कौशाम्बी के सिराथू तहसील में लेखपाल सुनील द्विवेदी द्वारा एक फरियादी को कथित रूप से धमकाने और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई थी, लेकिन अब पीड़ित पर समझौते का दबाव बनाए जाने की चर्चा है। इस स्थिति ने कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशाम्बी/उत्तर प्रदेश। सिराथू तहसील में एक फरियादी को कथित तौर पर “20 जूते मारने” की धमकी देने के आरोप में घिरे लेखपाल सुनील द्विवेदी का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद निलंबन और विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब इस प्रकरण में नई आशंकाएं सामने आ रही हैं।
सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि पीड़ित राम भवन पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे विभागीय जांच को समाप्त करने की तैयारी की जा सके। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बताया जाता है कि घरौनी से जुड़े कार्य के सिलसिले में पहुंचे फरियादी के साथ लेखपाल ने अभद्र व्यवहार किया और कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानजनक टिप्पणी की। इसी दौरान “20 जूते मारने” जैसी धमकी देने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लेखपाल को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए थे।
अब उठ रहा सवाल यह है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोप सामने आते हैं और उनके समर्थन में वीडियो भी सार्वजनिक होता है, तो क्या केवल समझौते के आधार पर कार्रवाई समाप्त कर दी जानी चाहिए? क्या ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी नहीं है?
इस पूरे प्रकरण ने सरकारी जवाबदेही और फरियादियों के सम्मान को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग पर टिकी हैं कि विभागीय जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी या फिर मामला समझौते के जरिए दबा दिया जाएगा।




