एलओसी पर हाथ मिलाते नजर आए भारत और पाकिस्तान के अधिकारी, सामने आई खास तस्वीर,जानिए ऐसा क्यों हुआ
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में एलओसी पार करने के बाद हिरासत में लिए गए एक पाकिस्तानी नागरिक को वापस भेज दिया गया है। दोनों सेनाओं के बीच हाथ मिलाकर उसे सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई। असद खान को गुरुवार को कुपवाड़ा के टीटवाल में किशनगंगा नदी पर बने अमन सेतु शांति पुल पर वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सौंपा गया।

श्रीनगर/एजेंसी। भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर भारतीय सीमा में आए एक पाकिस्तानी नागरिक को मानवीय आधार पर वापस पाकिस्तान भेज दिया। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुआ हाथ मिलाना हालिया तनाव के बीच एक दुर्लभ और सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के रहने वाले असद खान गलती से एलओसी पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे। उन्हें पिछले सप्ताह कुपवाड़ा जिले के टीटवाल सेक्टर के सिमरी क्षेत्र में भारतीय सेना ने हिरासत में लिया था।
भारतीय सेना की चिनार कोर ने बताया कि हिरासत के दौरान असद खान के साथ सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार किया गया। बाद में आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उन्हें सीमा पार एक निर्धारित बिंदु पर पाकिस्तान के अधिकारियों को सौंप दिया गया।
हैंडओवर प्रक्रिया के दौरान भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी सीमा के पास एक पुल पर मिले। इसी दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुआ हाथ मिलाना विशेष रूप से चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में इस तरह की घटनाएं कम ही देखने को मिलती हैं।
सेना के अनुसार, असद खान मूल रूप से खैबर पख्तूनख्वा के निवासी हैं और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में रह रहे थे। बताया गया है कि वह रोजगार की तलाश में नीलम घाटी गए थे और क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच रास्ता भटक कर अनजाने में भारतीय सीमा में प्रवेश कर गए।
सेना ने अपने बयान में कहा कि असद खान के साथ सहानुभूति और सम्मान के साथ किया गया व्यवहार भारतीय सेना की मानवीय मूल्यों और पेशेवर आचरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनकी सुरक्षित वापसी सेना के उच्चतम सैन्य मानकों और जिम्मेदारी के निर्वहन का उदाहरण है। यह स्थान श्रीनगर से लगभग 158 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। सेना ने हैंडओवर प्रक्रिया की तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सौहार्दपूर्ण व्यवहार देखा जा सकता है।
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