अप्रैल में ही कुएं सूखे, बांधों में पानी कम, एक-एक बूंद के लिए जान दांव पर लगा रही महिलाएं

Wells dried up in April itself, dams are low on water, women are risking their lives for every drop

  • महाराष्ट्र के नासिक समेत कई जिलों में जल संकट
  • पानी के लिए जान जोखिम में डाल रही महिलाएं
  • नासिक जिले के टोंडवाल का गांव वीडिया वायरल

महाराष्ट्र डेस्क। अभी अप्रैल खत्म नहीं हुआ है और महाराष्ट्र के पश्चिम विदर्भ और मराठवाड़ा में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने लगे हैं। 70 से अधिक गांवों में कुएं और हैंडपंप सूख गए हैं। नासिक जिले के पेठ तालुका में बोरिची बारी का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला जान दांव पर लगाकर सूखे कुएं में उतर रही है। टोंडवाल में ऐसे ही कुएं में प्लास्टिक के डिब्बे पानी के एक बूंद के लिए आपस में टकरा रहे हैं। यवतमाल में महिलाएं तपती धूप में पानी के लिए ऊबड़- खाबड़ रास्तों पर 2-3 किलोमीटर रोज पैदल चल रही है। अकोला जिले के उगवा गांव में घर के बाहर रखी टंकियों और ड्रम में ताले लगा रखे हैं। अमरावती जिले में कई गावों में जलस्रोत पूरी तरह से सूख चुके हैं। चिंता यह है कि अभी मई और जून की भीषण गर्मी का दौर बाकी है।
नासिक के बोरिची बारी में चार कुएं हैं, जिनमें से कुएं सूख चुके हैं। एक में पानी दो-चार दिन में खत्म होने वाला है। महिलाएं तल में बचे पानी को निकालने के लिए रस्सी पकड़कर कुएं में उतर रही हैं। गांव के उप सरपंच सोमनाथ निकुले ने बताया कि गांव के कुएं पूरी तरह से बारिश के पानी पर निर्भर हैं। इन कुंओं से जनवरी या फरवरी तक ही पानी मिल पाता है। स्थानीय लोगों को पानी लाने के लिए दो से तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और जो लोग इतनी दूर नहीं जा पाते हैं, उन्हें 200 लीटर के एक बैरल के लिए 60 रुपये देने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी योजना ‘जल जीवन मिशन’ के तहत काम शुरू हुआ था, लेकिन बीच में ही रुक गया। अब उनके सामने पानी खरीदने या जान दांव लगाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।
अभी मई और जून का महीना बाकी है और मार्च में महाराष्ट्र के 32 प्रमुख बांधों में वॉटर लेवल 18 प्रतिशत तक गिर चुका था। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इन वॉटर रिजर्व में सिर्फ़ 32.10 प्रतिशत पानी बचा है। यह राष्ट्रीय औसत 36.16 प्रतिशत और पिछले साल के इसी अवधि के स्तर से काफ़ी कम है। 32 में से 20 बांधों में 50 प्रतिशत से भी कम पानी है। करीब 10 फीसदी जलाशय सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। सोलापुर में उजानी बांध में इसकी क्षमता का सिर्फ़ 1.97 प्रतिशत पानी बचा है। पुणे के लोगों के लिए थोड़ी राहत की खबर है, क्योंकि मानिकदोह और घोड़ बांध 60.92 पानी अभी बचा है।

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