बदायूं कांड के 12 साल बाद फिर गरमाई यूपी की सियासत, कई जिलों में लगे सपा विरोधी होर्डिंग्स
12 साल पुराने बदायूं कांड की गूंज ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। लखनऊ से नोएडा तक लगे पोस्टर्स ने 2027 चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ा दिया है।

बदायूं/उत्तर प्रदेश। बहुचर्चित बदायूं कांड को करीब 12 साल पूरे होने पर प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बदायूं से लेकर राजधानी लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, हरदोई, कानपुर, शाहजहांपुर, कन्नौज, उन्नाव और कानपुर तक अचानक लगे बड़े-बड़े पोस्टर्स और होर्डिंग्स की खबरें सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नया बवाल खड़ा कर दिया है। इन पोस्टर्स में 2014 के चर्चित बदायूं डबल रेप और हत्याकांड का जिक्र करते हुए तत्कालीन समाजवादी सरकार पर निशाना साधा गया है। पोस्टर सामने आते ही सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई और मामला फिर सुर्खियों में आ गया।
प्रदेश के अलग-अलग शहरों में लगे पोस्टर्स का डिजाइन और संदेश लगभग एक जैसा दिखाई दिया। राजधानी लखनऊ के प्रमुख चौराहों, नोएडा और गाजियाबाद की व्यस्त सड़कों के अलावा बदायूं शहर में भी सुबह-सुबह लगे होर्डिंग्स चर्चा का विषय बन गए। पोस्टर्स में सपा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ एक छोटी बच्ची चेहरा ढके हुए दिखाई गई है।
पोस्टर पर मोटे अक्षरों में लिखा गया- महिला विरोधी सपाई और नीचे स्लोगन दिया गया- बेटियों की चीखें गुंडों का शोर, सपा राज में यही था दौर। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन पोस्टर्स को किस संगठन या राजनीतिक दल ने लगवाया है। किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पोस्टर वॉर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।
साल 2014 में अखिलेश यादव सरकार के दौरान बदायूं के कटरा क्षेत्र में दो शाक्य समाज की बहनों की मौत का मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था। उस वक्त प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर सपा सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे। अब 12 साल बाद फिर उसी मामले को पोस्टर वॉर के जरिए उठाया जा रहा है। राजनीतिक जानकर मान रहे हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पुराने मुद्दों को भावनात्मक तरीके से जनता के बीच लाने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है।
पोस्टर्स की जानकारी जैसे ही समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंची, नाराजगी सामने आने लगी। सपा समर्थकों का कहना है कि राजनीतिक फायदे के लिए पुराने मामलों को हवा दी जा रही है। फिलहाल इस पूरे मामले पर न तो समाजवादी पार्टी और न ही सत्ताधारी दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। लेकिन पोस्टर वॉर ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी जंग पोस्टर वॉर अब सोशल मीडिया तक पहुंच चुका है। एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बदायूं कांड से जुड़े पुराने वीडियो, तस्वीरें और बयान फिर वायरल होने लगे हैं। कहा जा रहा है कि समर्थक और विरोधी लगातार पोस्ट साझा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है।




