दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने की मांग तेज, महाभारतकालीन पहचान की होगी वापसी!

नई दिल्ली/एजेंसी। दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने की मांग जोर पकड़ रही है, जिसका उद्देश्य राजधानी को उसकी प्राचीन महाभारतकालीन पहचान वापस दिलाना है। दिल्ली को जिस तरह से इंद्रप्रस्थ की पहचान दिलाने की बात हो रही है और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने लगा है इससे इस बात पर चर्चा जरूर शुरू हो गई है क्या दिल्ली काे इंद्रप्रस्थ की पहचान मिल पाएगी।
कुछ समय पहले दिल्ली में पहली बार महाभारत के प्रमाणित दस्तावेज युद्ध के दौरान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए गीता के उपदेश वाले पार्थ सारथी रथ की स्थापना हुई है। वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) दिल्ली के पुराना किला में इंद्रप्रस्थ के दस्तावेज ढूंढने के लिए आजादी के बाद से लगातार खोदाई कर रहा है। अभी तक इस मामले में पांच बार खोदाई हो चुकी है। जिसमें पुराने किले में एएसआइ की खोदाई में 3000 साल पुराने अवशेष मिल चुके हैं।
एएसआइ के इंद्रप्रस्थ को लेकर साक्ष्यों की बात करें ताे पुराने किले में खाेदाई में पेंटेड ग्रे वेयर ( पीजीडब्ल्यू) के टुकड़े मिले हैं। ये पीजीडब्ल्यू पुराना किला में हुई लगभग हर बार की खोदाई में मिले हैं। पुरातत्वविद प्राे बी बी लाल की खोज के अनुसार पीजीडब्ल्यू को महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। पुराना किला में मिले पीजीडब्ल्यू जैसे ही प्रमाण हस्तिनापुर सहित महाभारत से संबंधित अन्य स्थानों पर हुई खोइाई में मिले हैं। हालांकि एएसआइ इसे लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कुछ माह पहले गृह मंत्रालय से दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने, पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित करने आदि का सुझाव दिया था। हालांकि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नाम बदलने वाला सरकार का आधिकारिक प्रस्ताव लंबी कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता वाला होगा।
वजीरपुर से भाजपा विधायक पूनम शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में विशेष उल्लेख (नियम संख्या 280) के तहत दिल्ली का नाम बदलने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अगुवाई में विधानसभा में प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा जाए। कहा कि यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक बड़ा अध्याय साबित होगा। दिल्ली को इद्रप्रस्थ नाम क्यों दिदया जाए, इसके लिए उन्होंने अपने तर्क भी दिए। उन्होंने अपनी बात को पुराने किले से जोड़ा। उन्होंने कहा कि खोदाई में मिले अवशेष और ”पग-पग” पर बिखरी हमारी विरासत इस बात की गवाह है कि यह वही भूमि है जहां धर्मराज ने धर्म की स्थापना की थी। उन्हाेंने कहा कि दिल्ली शब्द तो बहुत बाद में आया, लेकिन इन्द्रप्रस्थ हमारे अस्तित्व का मूल आधार है।
दिल्ली का नाम इन्द्रप्रस्थ क्यों होना चाहिए? इसके पीछे ठोस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तर्क हैं इन्द्रप्रस्थ नाम हमें गुलाम मानसिकता से मुक्त कर हमारे स्वर्णिम युग की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि इ्रद्रप्रस्थ नाम पहले से ही दिल्ली के अनेक संस्थानों में उपयोग किया जा रहा है। जिसमें इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, इंद्रप्रस्थ पावर स्टेशन, आईपी एस्टेट आदि शामिल हैं जो यह दर्शाता है कि इस नाम को समाज में व्यापक और स्वाभाविक स्वीकृति प्राप्त है।




