सीरिंज, ग्लोव्स और कैथेटर की भारी कमी… होर्मुज संकट से मेडिकल उपकरण निर्माण पर छाए संकट के बादल

नेशनल डेस्क। होर्मुज इलाके से तेल व गैस के जहाज को निकलने देने से एलपीजी गैस की आपूर्ति में थोड़ी राहत दिख रही है, लेकिन कच्चे माल की आपूर्ति अभी सुनिश्चित नहीं दिख रही है। इस वजह से मेडिकल उपकरण खास कर सीरिंज, ग्लोव्स, कैथेटर व अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न आइटम की कमी हो सकती है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डेवाइस इंडस्ट्री ने सरकार से इन आइटम के निर्माण से जुड़े कच्चे माल के आयात शुल्क में राहत देने की मांग की है ताकि ये आइटम घरेलू स्तर पर महंगे नहीं हो सके।
एसोसिएशन का कहना है कि इन आइटम के निर्माण से जुड़े विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक की कीमतों में पिछले 25 दिनों में 50 प्रतिशत तो पैकेजिंग की लागत में 20 प्रतिशत की बढोतरी हो चुकी है। एसोसिएशन का कहना है कि इन आइटम के निर्माता कच्चे माल के पुराने स्टाक से काम चला रहे हैं।
अमूमन उपकरण निर्माताओं के पास 20-30 दिनों का स्टाक होता है। लेकिन अगले एक-दो सप्ताह तक पश्चिम एशिया में युद्ध के जारी रहने पर कच्चे माल की कमी हो सकती है जिससे अस्पतालों में इलाज का काम प्रभावित हो सकता है और इन आइटम की कीमत बढ़ने से मरीजों का खर्च बढ़ेगा। एसोसिएशन के संयोजक राजीव नाथ ने बताया कि कच्चे माल व पैकेजिंग की लागत में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए कई निर्माता मेडिकल उपकरण के दाम में 10-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। अभी बाजार में मेडिकल उपकरण की कोई कमी नहीं है, लेकिन कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित रहने पर यह उपकरणों की कमी हो सकती है।
एसोसिएशन की तरफ सरकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मेडिकल उपकरण की लागत में बढ़ोतरी को रोकने के लिए कच्चे माल के आयात शुल्क में तीन प्रतिशत तक की राहत मिलनी चाहिए। वहीं, लाजिस्टिक लागत में भी उन्हें सरकार की तरफ से वित्तीय सहयोग दिया जाना चाहिए।
मेडिकल उपकरण बनाने की जगह इस प्रकार के आइटम का आयात करने वाले भी सरकार से आयात शुल्क में कमी की मांग कर रहे हैं। नाथ ने बताया कि सरकार को उनकी जगह कच्चे माल के शुल्क में राहत देनी चाहिए ताकि घरेलू स्तर पर इन उपकरणों का निर्माण जारी रहे और इनसे जुड़ी सैकड़ों यूनिट के कामगारों की नौकरी चलती रहे।

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