अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद,दो साथियों को भी मिली सजा
कश्मीर को बताया था पाकिस्तान का हिस्सा

श्रीनगर/एजेंसी। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की चीफ आशिया अंद्राबी को गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने अंद्राबी की दो साथियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी 30 साल की सजा सुनाई। दिल्ली की एक अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आसिया अंद्राबी और दो अन्य लोगों ने कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी। अदालत ने उन्हें राज्य के खिलाफ अपराध करने की साज़िश रचने और कड़े आतंकवाद-रोधी कानून यूएपीए के तहत एक आतंकवादी संगठन का सदस्य होने सहित विभिन्न अपराधों के लिए दोषी ठहराया है।
15 जनवरी को अदालत ने दोषी माना
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने 15 जनवरी को अंद्राबी और उनकी दो सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को दोषी ठहराया था। अदालत का 286 पन्नों के आदेश में दोषियों को कश्मीर को भारत से अलग करने के अवैध कृत्य के लिए आपस में साजिश रचने का दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जमा किए गए वीडियो में साफ तौर पर दिखाया गया है कि उन्होंने बार-बार दावा किया कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा है और भारत के जबरन कब्जे में है। इसमें कहा गया कि कश्मीर को भारतीय कब्जे से मुक्त किया जाना चाहिए ताकि यह पाकिस्तान का हिस्सा बन सके। रिकॉर्ड पर मौजूद कंटेंट ऐसे भाषणों के साथ-साथ सभी आरोपियों, विशेष रूप से आरोपी 1 (अंद्राबी) द्वारा की गई विभिन्न पोस्टों से भरी हुई थी। अदालत ने कहा कि अंद्राबी ने अपने भाषणों और साक्षात्कारों में स्पष्ट रूप से इस बात की वकालत की और पाकिस्तान से समर्थन मांगा कि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं रहा है। अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि आरोपी केवल यह नहीं कह रहे हैं कि कश्मीर विभाजन का एक अधूरा एजेंडा है, बल्कि उपरोक्त चर्चा से यह साफ होता है कि इस पहलू का दुरुपयोग आरोपियों द्वारा यह समर्थन करने, पुष्टि करने और प्रचारित करने के लिए किया जा रहा है कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि अंद्राबी द्वारा स्थापित संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ आत्मनिर्णय के अधिकार के दावे की आड़ में” भारत के एक अभिन्न अंग को भारत से अलग करने से संबंधित गतिविधियों में शामिल था।
इन धाराओं के तहत दोषी माना
15 जनवरी को अदालत ने उन्हें यूएपीए की धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या आतंकवादी संगठन का सदस्य होने पर सजा), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन का समर्थन करना) के तहत अपराधों का दोषी पाया। अदालत ने तीनों को आईपीसी की धारा 153 A (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना),153B (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे), 120B (आपराधिक साज़िश) और 505 (सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान) और 121A (राज्य के खिलाफ अपराध करने की साज़श) के तहत भी दोषी ठहराया। अदालत ने अब सजe की मात्रा पर दलीलें सुनने के लिए मामले को 17 जनवरी को सूचीबद्ध किया है। अंद्राबी और उनके दो साथियों पर फरवरी 2021 में कड़े UAPA और IPC के तहत कई अपराधों के औपचारिक आरोप लगाए गए थे।




