उत्तर पूर्वी दिल्ली योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन ने संम्पन की योगासन प्रतियोगिता

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। उत्तर पूर्वी दिल्ली योगासन स्पोर्ट्स असोसिएशन के संरक्षक डॉ यू के चौधरी की उपस्तिथि मे योगासन प्रतियोगिता मे अलग अलग वर्ग के प्रतिभागियों ने भाग लिया। डॉ यू के चौधरी ने बताया कि योग मात्र शारीरिक व्यायाम का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की चेतना और अनंत सार्वभौमिक चेतना का मिलन है। योग मन की प्रकृति की खोज की एक विधि है, जो अभ्यास और प्रत्यक्ष अनुभव पर बल देती है। योग शरीर, मन और आत्मा के विकास के लिए एक सामंजस्यपूर्ण प्रणाली पर आधारित एक प्राचीन कला है। आज बच्चों द्वारा योगासन प्रतियोगिता मे बहुत कुछ देखने को मिला और बच्चों द्वारा ऐसी प्रतियोगिताये उनके मन मे योग के लिए चेतना पैदा करती है।डॉ अध्यक्ष रचित कौशिक सचिव सत्यदेव चौधरी ने जीते हुए बच्चों को संरक्षक द्वारा सर्टिफिकेट और मैडल देकर भविष्य मे योग को बढ़ावा देने की बात कही। इस मौके पर डॉ संगीता चौधरी ने बच्चों का प्रोत्साहन बढ़ाया और लड़के हो या लड़की आज स्वास्थ्य रहने के लिए दोनों को योग से जुड़े रहने के मूल मन्त्र बताये।
मीडिया प्रभारी दीपक चौहान ने बताया कि यह योग एक प्राचीन विद्या है जिसका उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक आयामों में संतुलन और स्वास्थ्य लाना है। यह भारत में लंबे समय से प्रचलित एक लोकप्रिय अभ्यास है जो पश्चिमी समाज में भी तेजी से प्रचलित हो रहा है। ” योग ” का अर्थ है समाधि नामक अतिचेतन अवस्था में हमारी व्यक्तिगत चेतना का सार्वभौमिक दिव्य चेतना के साथ मिलन। इस मौके पर कोच मेंटर के साथ साथ सतकुमार शर्मा व संस्था कि कोषाध्यक्ष शालिनी सिंघल का भी सहयोग मिला।




