क्या गैरकानूनी है यूएस-इजरायल का ईरान पर अटैक?
खामेनेई की मौत पर उठे सवाल, जानिए युद्ध के नियम

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क। अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला किया है। 1,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले हुए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई शीर्ष अधिकारी मारे गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे ईरान के खतरे को खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए जरूरी बताया है, लेकिन आलोचक इसे अवैध कदम मान रहे हैं, इसके साथ ही कह रहे हैं कि किसी राष्ट्रपति की हद किसी दूसरे देश पर आक्रमण करने की नहीं है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पहले हमला करने वाला था, इसलिए यह कार्रवाई अमेरिका, उसके विदेशी ठिकानों और सहयोगियों की रक्षा के लिए की गई। उन्होंने बिना सबूत के कहा कि ईरान एक महीने में परमाणु हथियार हासिल कर सकता था, जबकि कुछ महीने पहले उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह कर दिया है।
ट्रंप ने हमले के उद्देश्यों में बदलाव दिखाया है। कभी उन्होंने इसे इमिनेंट खतरे के खिलाफ बताया, तो कभी ईरान के शासन को बदलने या उसके लोगों को आजाद करने की बात की। कई दावे अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स से मेल नहीं खाते।
1973 का वॉर पावर्स रेजोल्यूशन (WPR) राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई पर अंकुश लगाता है। इसके अनुसार, राष्ट्रपति कांग्रेस की ओर से युद्ध घोषित करने, विशेष अनुमति देने या अमेरिकी धरती/सेना पर हमले के जवाब में ही सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं।
राष्ट्रपति को कांग्रेस को रिपोर्ट देनी पड़ती है, जो ट्रंप प्रशासन ने शुरू कर दी है। अगर बिना अनुमति के कार्रवाई हो तो 60 दिनों में सेना वापस बुलानी पड़ती है, जब तक कांग्रेस इसे बढ़ाए नहीं। कांग्रेस के दोनों पक्षों के सदस्य इस हफ्ते ऐसी कार्रवाई रोकने के लिए विधेयक लाने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिकी संविधान में कांग्रेस को युद्ध घोषित करने का अधिकार है, जबकि राष्ट्रपति सेना के कमांडर-इन-चीफ होते हैं और विदेश नीति संभालते हैं। कई राष्ट्रपतियों ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के छोटे-मोटे हमले किए हैं, जब वे राष्ट्रीय हित में लगे हों। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान पर यह बड़े पैमाने का हमला संविधान की सीमाओं को पार कर रहा है, क्योंकि यह युद्ध जैसा है। यह ट्रंप की सैन्य शक्ति की सीमा को परख रहा है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, देशों को दूसरे देश पर बल प्रयोग या धमकी से बचना चाहिए। बल प्रयोग की इजाजत सिर्फ UN सुरक्षा परिषद की मंजूरी से या सशस्त्र हमले के जवाब में आत्मरक्षा में मिलती है। यहां न तो UNSC की मंजूरी है और न ही ईरान ने पहले हमला किया था।
प्री-एम्प्टिव सेल्फ-डिफेंस का कॉन्सेप्ट है जिसमें अगर कोई इमिनेंट और भारी हमला होने वाला हो तो कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन अमेरिका ने इसके ठोस सबूत नहीं दिए। अमेरिका के पास UNSC में वीटो पावर है, जिससे वह खुद को बचा सकता है। कई देश इसे अवैध मान रहे हैं।
खामेनेई की मौत पर कानूनी बहस है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने असल हमला किया, जबकि अमेरिका ने खुफिया जानकारी और सपोर्ट दिया। 1981 में रोनाल्ड रीगन ने एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 12333 जारी किया था, जो अमेरिकी सरकार या उसके एजेंट्स द्वारा हत्या पर रोक लगाता है। खासकर शांति काल में नेता की हत्या को Assassination माना जाता है। लेकिन अगर सशस्त्र संघर्ष चल रहा हो तो नेता को मारना युद्ध का वैध हिस्सा हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मामला साफ नहीं है, क्योंकि हमला बिना युद्ध घोषणा के शुरू हुआ।




