प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं जन-मन से सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

शोभित शर्मा,एमसीबी/छत्तीसगढ़। एमसीबी जिले के ठगगाव से करवा पहुंच मार्ग सड़क की लागत 3.39 करोड़ उनचालिस लाख रुपए है जो महज पांच दिनों में ही परत दर परत उखड़ रही है एवं ठगगाव से तेदूडाड पहुंच मार्ग का ठेकेदार बैजनाथ अग्रवाल सूरजपुर के द्वारा कराया जा रहा है जो पूर्ण रूप से घटिया एवं गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य कराया जा रहा है। सड़क पर डामरीकरण का कार्य निर्माणाधीन सडक से डामर प्लांट की दूरी 50 से 60 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए मगर यहां पर तो 100 किलोमीटर दूरी से डामरीकरण कार्य किया जा रहा है जिससे डामर का टेम्परेचर कम हो जाता है उसे ही सड़क पर बिछाकर सड़क डामरीकरण कार्य किया जा रहा है प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारी नहीं करते हैं जांच ठेकेदार मनमाने तरीके से कर रहा है सड़क का निर्माण कार्य सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा राज्य स्तर पर संचालित जन-मन से सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई गांवों में हाल ही में बनी सड़कों में दरारें पड़ने, गिट्टी उखड़ने और बारिश के बाद सड़क धंसने की शिकायतें सामने आई हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। कई स्थानों पर सड़क की मोटाई निर्धारित मापदंडों से कम पाई गई है, वहीं डामर की परत भी बेहद पतली बताई जा रही है और डामर की परत महज़ पांच दिनों में ही उखड़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद उसकी हालत खराब हो जाती है जगह जगह गढे दिखाई देने लगते हैं। जिससे आवागमन में परेशानी और आये दिन दुर्घटनाए होती है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी विभाग के किसी अधिकारी के द्वारा नहीं किया जाता है संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण औपचारिकता तक सीमित रहता। कुछ स्थानों पर बिना समुचित रोलिंग और समतलीकरण के ही डामरीकरण कर दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य होता है, जैसे—सबग्रेड की मजबूती, पर्याप्त मोटाई की बेस लेयर, गुणवत्ता युक्त डामर और उचित जल निकासी व्यवस्था। इन मानकों की अनदेखी से सड़क की आयु कम हो जाती है और सरकारी धन का दुरुपयोग होता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई हो तथा क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही, भविष्य में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और पारदर्शिता की व्यवस्था की जाए। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों को कब तक बेहतर एवं टिकाऊ सड़क सुविधा मिल पाती है।

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