मोतिहारी में फर्जी ‘अग्नि एप’ के जरिए 1.13 करोड़ की ठगी, मास्टरमाइंड हरियाणा से गिरफ्तार

मोतिहारी/बिहार। जिले में फर्जी अग्नि एप से लुभावने व आकर्षक प्लान का प्रलोभन देकर करीब 1 करोड़ 13 लाख रुपये ठगी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह का मास्टरमाइंड संगम कुमार को साइबर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
मोतिहारी साइबर पुलिस की टीम ने छापेमारी कर हरियाणा से उसे गिरफ्तार कर लिया। वह फरीदाबाद के पाली करेशर जोन थाना अंतर्गत पाली गांव का रहने वाला है।
साइबर डीएसपी अभिनव परासर ने बताया कि गिरोह में शामिल बदमाशों को चिन्हित कर लिया गया है। जल्द उन सभी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि संगम ने युवकों को उक्त फर्जी एप के माध्यम से मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल का भुगतान, विज्ञापन आदि करने पर अधिक से अधिक रिर्टन का प्रलोभन दिया था।
साथ ही जो जितना पूंजी लगाएगा, उसको अधिक फायदा मिलने का लालच भी दिया था। एक करोड़ से अधिक रकम जमा होने के बाद संगम ने एप बंद कर दिया और शातिर ठगों ने पूरा रुपये निकाल लिया। इससे युवकों का करोड़ों रुपये डूब गए। मामला 2025 का है।
घटना को लेकर रक्सौल थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटा परेउवा ब्लाक रोड वार्ड संख्या-18 निवासी अभिषेक कुमार शर्मा ने साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें संगम के अलावा दिल्ली का जितेंद्र कुमार शर्मा उर्फ विक्की, यूपी निवासी संजीव कुमार, जितेंद्र शर्मा व संतोष कुमार को आरोपित किया था।
संगम ने खुद को अग्नि एप का सीओ बताया था। छापेमारी टीम में साइबर डीएसपी के अलावा इंस्पेक्टर मुमताज आलम, राजीव कुमार सिन्हा, दारोगा शिवम कुमार सिंह व सिपाही राकेश कुमार शामिल थे। गिरोह ने आधा दर्जन से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया है। ठगी के शिकार सभी रक्सौल थाना क्षेत्र के हैं। गिरोह ने रक्सौल ने सेमिनार लगाया। जहां ठगों ने फर्जी एप का लुभावना व आकर्षक प्लान बताया। साथ ही एप में अधिक पूंजी जमा करने पर कार समेत अन्य आकर्षक गिफ्ट देने का लालच दिया। भरोसा में आने के बाद युवकों ने बदमाशों द्वारा बताए गए अकाउंट में रुपये डाल दिए। कुछ दिनों तक युवकों के अकाउंट में कमीशन के तौर पर रुपये आया। कुछ दिन बाद बदमाशों ने कमीशन देने के साथ आप भी बंद कर दिया।
मनोहर ने ऐप में सर्वाधिक 47.87 लाख रुपए लगाए थे। इसके अलावा अभिषेक- 21.95 लाख, रुपेश-9.10 लाख, नारायण कुमार- 7.50 लाख, असलम आलम-5.90 लाख रुपए समेत अन्य युवकों ने रुपये लगाए थे। युवकों को भरोसा था कि अधिक पूंजी लगाने पर लाभ भी अधिक मिलेगा। रुपये आना बंद होने पर उन लोगों को एहसास हुआ कि वह सभी ठगी के शिकार हो गए हैं।




