दिल्ली में कर्तव्य पथ पर दिखेगी जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक धरोहर की झांकी

जम्मू/एजेंसी। दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ पर जम्मू-कश्मीर की झांकी जम्मू-कश्मीर की शिल्प कला और लोकनृत्यों की प्रस्तुति से दुनिया भर में बैठे लोगों को एक बार जम्मू-कश्मीर देखने की चाहत जगाने को तैयार है। झांकी अब बनकर तैयार है और लोक कलाकार अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। पद्मश्री बलवंत ठाकुर द्वारा परिकल्पित डिजाइन और निर्मित झांकी में पूरे जम्मू-कश्मीर की हस्तशिल्प कला और लोक नृत्यों को दर्शाया गया है। जम्मू-कश्मीर को एक सहज सांस्कृतिक निरंतरता के रूप में पेश किया जाएगा। इसमें सदियों पुरानी शिल्प कौशल को जीवंत लोक प्रदर्शन परंपराओं के साथ एक ही कहानी में पिरोया जाएगा।
झांकी का एक तरफ का हिस्सा पुरानी कलाओं की भव्यता से चमकेगा जिसमें एक पारंपरिक समोवर, कश्मीरी केतली, पालिश किया हुआ और बारीकी से उकेरा हुआ। कहानी से भरी सटीकता के साथ बुनी गई शाल के साथ दिखाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ शांति लय में बदल जाएगी। जिसमें रबाब, संतूर और बांसुरी का मिश्रण हवा में गूंजेगा।
पद्मश्री बलवंत ठाकुर द्वारा परिकल्पित, डिजाइन और निर्मित जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और लोक नृत्य, थीम वाली यह झांकी कालातीत शिल्प विरासत और लोक संस्कृति और नया जम्मू और कश्मीर की विकसित होती पहचान को जीवंत तरीके से दर्शाएगी। झांकी के सबसे आगे समोवर दिखेगा तो बीच में बैंगनी रंग के केसर के खेत घूमते हुए दिखेंगे। बलवंत ठाकुर ने बताया कि यह झांकी एक रेशमी टेपेस्ट्री की तरह होगी, जो जम्मू-कश्मीर को एक अद्वितीय सांस्कृतिक निरंतरता के रूप में प्रकट करेगी। जहां शिल्प कौशल और प्रदर्शन एक शानदार कहानी में विलीन हो जाते हैं। हाथ से बुने हुए कालीन समृद्ध ज्यामितीय सामंजस्य में उभरते हुए। अखरोट की लकड़ी की नक्काशी के साथ आकार दी गई गहरी और नाजुक जाली दिखाती है। वे भी कश्मीर हस्तशिल्प के झांकी के प्रदर्शन का हिस्सा होंगे।
बसोहली पेंटिंग, पेपरमेशी कलाकृतियां जीवंत रंगों में चमकेंगी और पहाड़ी लघु चित्रकला, विशेष रूप से बोल्ड बसोहली शैली, सदियों से पोषित परिष्कृत सौंदर्यशास्त्र को विकीर्ण करेगी। ये सभी तत्व मिलकर उन कारीगरों को मौन श्रद्धांजलि देंगे जिनके छेनी, करघे और ब्रश इन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। पद्मश्री बलवंत ठाकुर द्वारा परिकल्पित, डिजाइन और निर्मित जम्मू-कश्मीर की झांकी को इस बार पुरस्कार मिलने की उम्मीद है। बलवंत ठाकुर जब जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी के सचिव थे, तो वर्ष 1997, 1998, 1999, 2001 और 2002 में जम्मू-कश्मीर का पहला स्थान प्राप्त हुआ था। इस बार भी जब पद्मश्री बलवंत ठाकुर के हाथ में झांकी की जिम्मेदारी है तो लोगों को उम्मीद है कि इस बार भी कोई न कोई पुरस्कार जम्मू-कश्मीर की झांकी को जरूर मिलेगा।
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