माता वैष्णो देवी के भक्तों का बड़ा इंतजार पूरा, खोली गई वैष्णो देवी मंदिर की प्राकृतिक गुफा
जम्मू/एजेंसी। मकर संक्रांति के मौके पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने माता वैष्णो देवी के भक्तों का बड़ा इंतजार खत्म कर दिया। बोर्ड ने पवित्र तीर्थस्थल पर पूजनीय ऐतिहासिक प्राकृतिक गुफा को फिर से खोल दिया। खोलने के मौके पर विशेष अनुष्ठान और प्रार्थनाएं की गई। इस मौके पर वैदिक मंत्रों का भी जाप भी किया गया। मकर संक्रांति पर इस पवित्र आयोजन का समय और भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह त्योहार नई शुरुआत और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। प्राकृतिक गुफा जो साल के अधिकतर समय तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ के कारण बंद रहती है जनवरी और फरवरी के महीनों में खोली जाती है। जब तीर्थयात्रियों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम होती है। यह व्यवस्था भक्तों को अपने मूल रूप में दर्शन का अनुभव करने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है। जिससे उन्हें मंदिर की शाश्वत पवित्रता के साथ गहरा जुड़ाव महसूस होता है।
बाकी महीनों में तीर्थयात्री नई बनी गुफाओं के माध्यम से गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। पुरानी गुफा को खोलना उपराज्यपाल जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में श्राइन के आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने और उन परंपराओं की रक्षा करने की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जो इसे भारत के सबसे प्रतिष्ठित आध्यात्मिक स्थलों में से एक बनाती हैं। श्राइन बोर्ड अधिक से अधिक भक्तों को पुरानी गुफा के माध्यम से तीर्थयात्रा करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेगा साथ ही भीड़ की अनुमत क्षमता सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा और तीर्थयात्रियों की व्यवस्थित आवाजाही बनाए रखेगा।
बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने और रास्ते में भीड़भाड़ को रोकने के लिए सावधानीपूर्वक उपाय लागू किए गए हैं। बुजुर्ग और दिव्यांग तीर्थयात्रियों की सहायता के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। यह उल्लेखनीय है कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में तीर्थयात्रियों की संख्या में काफी वृद्धि देखी जा रही है। 2026 के पहले 13 दिनों के दौरान लगभग 305217 तीर्थयात्रियों ने पवित्र तीर्थस्थल पर दर्शन किए। जबकि पिछले साल इसी अवधि में 268761 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए थे। औसतन लगभग 20000 से 25000 तीर्थयात्री प्रतिदिन पवित्र तीर्थस्थल पर आ रहे हैं।




