एम्स के लिए 10 साल से नंगे पैर चल रहे तारा पाटकर, पीएम को 47 बार लिखा खून से खत

महोबा/उत्तर प्रदेश। क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने एवं बुंदेलखंड में एम्स खुलवाने की मांग को लेकर बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर बुंदेलखंडी पिछले 10 साल से नंगे पैर चलने का अनूठा सत्याग्रह कर रहे हैं। अपनी मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने एक सितंबर, 2015 को जूते चप्पल त्याग दिए थे। इसके अलावा वे 259 दिन अनशन कर चुके हैं। पोस्टकार्ड अभियान चला कर एक लाख से अधिक खत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम भेज चुके हैं और 47 बार अपने खून से प्रधानमंत्री को खत लिखकर भेज चुके हैं। तीन साल से अन्न त्याग सत्याग्रह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अफसोस तो इस बात का है कि इतना सब करने के बाद भी वे जिला अस्पताल की हालत तक नहीं ठीक करवा पाए । केंद्र सरकार देश भर में अब तक 23 एम्स खोलने
की घोषणा कर चुकी है। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर व रायबरेली में एम्स चालू हो चुके हैं लेकिन बुंदेलखंड को एम्स की सौगात अब तक नहीं मिल पाई है जबकि यहां की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल सबसे बुरा है। योगी के आठ साल के कार्यकाल में बुंदेलखंड क्षेत्र को एक भी नया मेडिकल कालेज नहीं मिल सका। महोबा के लिए बस एक ट्रामा सेंटर पास हुआ है। तारा पाटकर बुंदेलखंडी ने बताया कि नंगे पैर चलने में बहुत तकलीफ होती है। अक्सर पैर चोटिल हो जाते हैं लेकिन जब तक
मोदी जी बुंदेलखंड के लिए एम्स की घोषणा नहीं करते, नंगे पैर चलने का उनका हठयोग सत्याग्रह जारी रहेगा। उनकी इच्छा है कि जिस तरह अप्रैल में हरियाणा के यमुनानगर की जनसभा में मोदी जी ने 14 साल से नंगे पैर चल रहे कैथल जिले के रामपाल कश्यप को जूते पहनाए थे, बुंदेलखंड आकर वे एम्स की घोषणा करें और उनको भी खुद जूते पहनाए ।

 

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