प्रयागराज-वाराणसी के बाढ़ग्रस्त मोहल्लों में चल रही नाव, घरों में घुसा गंगाजल, परेशान जनता का पलायन शुरू

प्रयागराज/वाराणसी। गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि से प्रयागराज और वाराणसी में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। प्रयागराज के बेली क्षेत्र में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को आवागमन के लिए फिर से नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। वाराणसी के राजापुर और गंगानगर जैसे मोहल्लों से लोग अपने परिवार और सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से अब महज एक मीटर नीचे है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक महीने के भीतर दूसरी बार उन्हें बाढ़ का संकट झेलना पड़ रहा है। पिछली बाढ़ का पानी उतरते ही लोग घरों की सफाई कर मुश्किल से सामान्य जीवन में लौटे थे, लेकिन अब फिर से पानी मोहल्लों में घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग बताते हैं कि बाढ़ से जहां आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है, वहीं मच्छरों की भरमार से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी मंडरा रहे हैं। राजापुर और गंगानगर क्षेत्र के हालात इतने खराब है कि परिवार बच्चों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल पड़े है। बेली इलाके में नावों का सहारा ही अब आवागमन का जरिया बन गया है।
वरुणा भी उफान पर, शिविरों में पहुंचे लोग
वाराणसी में भी हालात बिगड़ने लगे है। गंगा का जलस्तर बीते 48 घंटे में करीब तीन मीटर बढ़कर बुधवार तड़के चेतावनी बिंदु को पार कर गया। यह पहला मौका है जब एक ही महीने में दूसरी बार गंगा ने चेतावनी बिदु पार किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर घंटे जलस्तर में करीब तीन सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हो रही है और गुरुवार तक लाल निशान पार होने की आशंका है।
गंगा का पानी दशाश्वमेध, अस्सी, सामने घाट और मणिकर्णिका घाट से होते हुए शहर की गलियों और रिहायशी इलाको में घुसने लगा है। दशाश्वमेध घाट की जल पुलिस चौकी डूब चुकी है, जबकि शीतला मंदिर का ऊपरी हिस्सा ही पानी से बाहर नजर आ रहा है। अस्सी से राजघाट के बीच तीन हजार से अधिक मंदिर बाढ़ के पानी में समा गए है। गंगा के साथ ही सहायक नदी वरुणा में भी उफान से तटवर्ती इलाकों में हालात बिगड़ रहे हैं।
प्रशासन प्रभावित लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचा रहा है। नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार, बनारस में यह पहला मौका है जब एक ही सीजन में महज एक महीने के भीतर दूसरी बार बाढ़ जैसी स्थिति बनी है। इधर, केंद्रीय जल आयोग ने चेतावनी दी है कि बलिया में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर है और यह अब तक के उच्चतम बाढ़ बिंदु की ओर बढ़ रहा है।



