‘प्रेमानंद महाराज मेरे सामने एक अक्षर संस्‍कृत बोलकर दिखा दें’, रामभद्राचार्य ने दिया चैलेंज

मथुरा/उत्तर प्रदेश। वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज कभी अपने प्रवचनों से तो कभी आलोचकों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को चमत्कारी मानने से इनकार किया है। एक इंटरव्‍यू में रामभद्राचार्य ने कहा ने कहा- ‘प्रेमानंद महाराज मेरे लिए बालक समान हैं। मेरे मन में उनके प्रति कोई दुर्भावना नहीं है, लेकिन मैं उन्‍हें विद्वान या चमत्कारी पुरुष नहीं मान सकता। अगर वे वास्तव में चमत्कारी हैं, तो उनके सामने एक शब्द संस्कृत बोलकर दिखाएं।’
एनडीटीवी चैनल के पॉडकास्‍ट में रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता को क्षणभंगुर बताया है। उन्‍होंने कहा- ‘आजकल लोग भजन से प्रभावित हो जाते हैं, लेकिन इसे चमत्कार कहना सही नहीं है। पहले विद्वान लोग ही कथावाचन करते थे, लेकिन आजकल मूर्ख लोग भी धर्म का ज्ञान देने लगे हैं।’ रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को चुनौती भी दे दी। उन्‍होंने कहा- ‘मैं जो भी संस्कृत श्लोक बोलूं, प्रेमानंद जी उसका अर्थ हिंदी में समझा दें। चमत्कार वही कहलाता है, जो शास्त्रों की चर्चा में सहज हो और श्लोकों का स्पष्ट अर्थ बता सके।’
भक्‍तों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं प्रेमानंद महाराज
आपको बता दें कि प्रेमानंद महाराज का भजन और प्रवचन भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। उनके आश्रम में देश और विदेश से आम भक्‍तों के साथ लोकप्रिय शख्सियतें भी दर्शन करने आती रहती हैं। सोशल मीडिया पर बाबा के प्रवचन के वीडियो तुरंत वायरल हो जाते हैं। वह हमेशा पीला वस्‍त्र धारण करते हैं और माथे पर पीला चंदन लगाते हैं। वह पिछले 19 सालों से किडनी की बीमारी से ग्रस्‍त हैं।
तुलसी पीठ के संस्‍थापक हैं रामभद्राचार्य
वहीं, रामभद्राचार्य चित्रकूट स्थित तुलसी पीठ के संस्थापक और प्रमुख हैं। उन्हें चार अलग-अलग विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधि मिली है। वे 80 से ज्‍यादा किताबें लिख चुके हैं। जन्‍म से उनकी आंखें नहीं हैं लेकिन वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उनके आश्रम में भी लगातार सेलिब्रेटीज आते रहते हैं।

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