अब सिर्फ 40 रुपये में पहुंचेंगे पठानकोट से जोगिंदरनगर, चार साल बाद फिर से बहाल हुई रेल सेवा
लगातार चार वर्षों तक चले निर्माण कार्य के बाद अब चक्की दरिया पर नया रेलवे पुल तैयार हो गया है। पुल के निर्माण के साथ ही रेल ट्रैक को फिर से बहाल कर दिया गया है और आज से ट्रेन सेवा का औपचारिक संचालन शुरू कर दिया गया।

पठानकोट/पंजाब। हिमाचल प्रदेश और पंजाब क लोगों के लिए राहत भरी खबर है। लगभग चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरो-गेज रेल लाइन पर मंगलवार से ट्रेन सेवाएं फिर शुरू हो गई हैं। इस रूट को कांगड़ा वैली रेलवे के नाम से जाना जाता है। अगस्त 2022 में आई भीषण बाढ़ के दौरान चक्की रेलवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके बाद इस ऐतिहासिक रेल मार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया था। उत्तरी रेलवे ने फिलहाल पठानकोट और बैजनाथ पपरोला के बीच यात्री ट्रेनों के दो जोड़े चलाने का फैसला किया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार सभी तकनीकी और सुरक्षा जांच पूरी कर ली गई हैं तथा रेल मार्ग संचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। बता दें कि कांगड़ा वैली रेलवे हिमाचल प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन लाइनों में से एक मानी जाती है। यह रेल मार्ग पठानकोट, नूरपुर, कांगड़ा, ज्वालामुखी, पालमपुर, बैजनाथ और जोगिंदरनगर जैसे प्रमुख शहरों और कस्बों को जोड़ता है। छात्रों, कर्मचारियों, व्यापारियों, मरीजों और पर्यटकों के लिए यह एक सस्ता और सुविधाजनक यात्रा साधन है। सेवा बहाल होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नया बल मिलने की उम्मीद है। पठानकोट से जोगिंदरनगर तक पहुंचने में अब सिर्फ 40 रुपये लगेंगे।
रेलवे सेवाओं की बहाली चक्की रेलवे पुल के पुनर्निर्माण के बाद संभव हो सकी है। वर्ष 2022 में चक्की नदी में आई बाढ़ के दौरान पुल के पांच खंभे बह गए थे, जिससे रेल यातायात ठप हो गया था। इसके बाद आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की सलाह पर लगभग 70 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल तैयार किया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पुल ने सफल ट्रायल रन और सभी सुरक्षा परीक्षणों को पास कर लिया है।




