गाजियाबाद फर्जी पासपोर्ट कांड: जेल भेजे गए दो और आरोपी, फरार सिपाही की तलाश तेज

कश्मीरी कनेक्शन से बढ़ी चिंता

गाजियाबाद। भोजपुर थानाक्षेत्र में फर्जी पतों पर जारी हुए 22 पासपोर्ट मामले में पुलिस ने मंगलवार को पकड़े गए आरोपित मुश्ताक अहमद और मुदासिर खान को जेल भेज दिया। इस मामले में अब तक 10 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
जबकि भोजपुर थाने का तत्कालीन सिपाही दीपक कुमार फरार चल रहा है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के लिए फर्जी पहचान पत्र तैयार करने वाले की तलाश भी की जा रही है। दैनिक जागरण ने मुश्ताक और मुदासिर पकड़े जाने की जानकारी सबसे पहले दी थी।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल के मुताबिक गिरफ्तार आरोपित दिल्ली के ख्याला स्थित डीडीए कालोनी निवासी मुश्ताक अहमद और दिल्ली के दरियागंज स्थित गली आउलिया ऊंछा चलान निवासी मुदासिर खान हैं।
मुदासिर मूल रूप से श्रीनगर के बटमालू का रहने वाला है और कई वर्षोँ से दरियागंज में रहकर कैब चलाता है। पूछताछ में मुश्ताक ने बताया कि वह दिल्ली में प्रापर्टी डीलिंग के साथ पासपोर्ट बनवाने का काम करता था। फर्जी दस्तावेज तैयार कर फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाने के एवज में वह प्रति ग्राहक करीब डेढ़ लाख रुपये लेता था। ग्राहक जुटाने का काम उसका साथी मुदासिर करता था। जिसे प्रति पासपोर्ट 25 हजार रुपये दिए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि गैंग खुद के मोबाइल नंबर और ईमेल आइडी से आवेदन करता था। फर्जी कागजात पर सिम लेकर आवेदन किए जाते थे। 22 में से 13 पासपोर्ट एक ही मोबाइल नंबर से और बाकी दो अन्य नंबरों से आवेदन किए गए थे। आवेदकों से केवल फोटो और हस्ताक्षर लिए जाते थे, बाकी दस्तावेज गैंग तैयार करता था। गैंग ने पासपोर्ट सेवा केंद्र की बजाय पोस्ट आफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसको) को निशाना बनाया।
पुलिस के अनुसार पासपोर्ट सेवा केंद्रों में सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरे होने के साथ ही स्टाफ भी प्रशिक्षित होता है, जबकि डाकखानों में स्टाफ पीएसके जितना प्रशिक्षित नहीं होता। पुलिस शाखा अब यह जांच कर रही है कि नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है तथा सत्यापन प्रक्रिया में किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
कश्मीरी कनेक्शन से बढ़ी पुलिस की चिंता
भोजपुर फर्जी पासपोर्ट प्रकरण में गिरफ्तार मुदासिर खान के कश्मीरी कनेक्शन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। मूल रूप से श्रीनगर के बटमालू क्षेत्र का रहने वाला मुदासिर कई वर्षों से दिल्ली में रह रहा था और मुश्ताक अहमद के लिए ग्राहक जुटाने का काम करता था। जिस तरह उन्होंने पासपोर्ट पूरा फर्जीवाड़ा कर तैयार कराए हैं। ऐसे किसी भी आतंकी का तैयार कराया जा सकता है। यदि इसी नेटवर्क के संपर्क में कोई बड़ा अपराधी या आतंकी तत्व आ जाता तो फर्जी पहचान के आधार पर उसका भी पासपोर्ट जारी हो सकता था।

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