आईएएस प्रदीप शर्मा और कच्छ के पूर्व कलेक्टर को 5 साल की जेल

10 हजार का जुर्माना, गुजरात लैंड केस में हुई सजा

अहमदाबाद/एजेंसी। गुजरात के कच्छ जिले की एक अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को 5 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है। यह सजा 2011 के एक मामले में सुनाई गई है। मामला यह है कि प्रदीप शर्मा ने एक प्राइवेट कंपनी को सरकारी जमीन आवंटित करने में गड़बड़ी की थी। उस समय वे जिले के कलेक्टर थे। इस गड़बड़ी से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ था।अदालत ने प्रदीप शर्मा के साथ-साथ शहरी योजनाकार नटुभाई देसाई, तत्कालीन मामलतदार नरेंद्र प्रजापति और तत्कालीन निवासी डिप्टी कलेक्टर अजीतसिंह झाला को भी 5 साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, सभी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला 2004 का है। उस समय प्रदीप शर्मा गुजरात में कच्छ जिले के कलेक्टर थे। आरोप है कि उन्होंने Saw Pipes Pvt Ltd नाम की कंपनी को सरकारी जमीन आवंटित करने में अनियमितताएं की थीं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदीप शर्मा की यह सजा अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने 20 जनवरी को 2004 के एक भ्रष्टाचार मामले में दी गई 5 साल की सजा पूरी होने के बाद शुरू होगी। मतलब, उन्हें पहले उस मामले की सजा काटनी होगी, फिर इस मामले की।
इस मामले में एफआईआर 2011 में राजकोट जोन सीआईडी क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। प्रदीप शर्मा और तीन अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 409, 120बी और 217 के तहत मामला दर्ज किया गया था। धारा 409 सरकारी कर्मचारियों द्वारा विश्वासघात करने से संबंधित है। धारा 120B आपराधिक साजिश रचने से संबंधित है। और धारा 217 एक लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा करने से संबंधित है। प्रदीप शर्मा को 4 मार्च, 2011 को गिरफ्तार किया गया था।
विशेष लोक अभियोजक एच. बी. जडेजा ने बताया कि अदालत ने 52 दस्तावेजी सबूतों और 18 अभियोजन गवाहों के बयानों पर विचार किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रदीप शर्मा ने Saw Pipes Private Limited को एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए जमीन आवंटित करने में नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने राज्य सरकार के नियमों और विनियमों को ताक पर रख दिया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
जमीन का आवंटन दो हेक्टेयर की सीमा से ऊपर था। इसके अलावा, यह गुजरात सरकार के राजस्व विभाग के 6 जून, 2003 के प्रस्ताव का भी उल्लंघन था। प्रस्ताव में कलेक्टर को औद्योगिक उद्देश्यों के लिए अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि आवंटित करने का अधिकार दिया गया था। मतलब, कलेक्टर सिर्फ 2 हेक्टेयर तक जमीन दे सकते थे, लेकिन उससे ज्यादा जमीन आवंटित की गई।
अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि अन्य तीनों आरोपियों ने मुख्य आरोपी के साथ साजिश रचने का अपराध किया। इस पूरे मामले में अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि प्रदीप शर्मा और अन्य आरोपियों ने मिलकर सरकारी जमीन के आवंटन में गड़बड़ी की, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इसलिए, अदालत ने सभी को 5 साल की कैद और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।

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