कानपुर में ठग को ठगने वाले पूर्व पत्रकार को डीजीपी प्रशांत कुमार ने किया सम्मानित

साइबर क्राइम का ब्रांड एबेसडर बनाया

कानपुर/उत्तर प्रदेश। साइबर क्राइम की टीम भूपेंद्र का एक वीडियो भी जारी करेगी, जिसमें बताया जाएगा कि किस तरह से ठग को ठगा है। इसके साथ ही बीते दिनों पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार और एडिशनल सीपी हरीश चंदर ने भी भूपेंद्र से मुलाकात की थी। दोनों ही वरिष्ठ अधिकारियों ने भूपेंद्र से बातचीत कर साइबर ठग को कैसे चूना लगाया, उन बारीकियों को समझा। भूपेंद्र सिंह की इस पहल की जमकर सराहना हुई थी।
कानपुर जिले के बर्रा निवासी भूपेंद्र सिंह को साइबर ठगों ने फंसाने का प्रयास किया। वह एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। पहले मीडिया में काम कर चुके हैं। वह साइबर ठगी के तौर-तरीकों से परिचित थे। 6 मार्च को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को सीबीआई और मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। कॉलर ने भूपेंद्र पर अश्लील वीडियो देखने का आरोप लगाते हुए डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी।
भूपेंद्र ने घबराने की बजाय ठग को ही उलझाने की योजना बनाई। उन्होंने 16 साल के किशोर की तरह बात करना शुरू कर दिया और ठग से गिड़गिड़ाने लगे कि उनकी मां को न बताया जाए, जबकि असल में उनकी मां का निधन हो चुका था। 7 मार्च को भूपेंद्र ने तय किया कि वह ठग को सबक सिखाएंगे। उन्होंने ठग को कहानी सुनाई कि उनके पास एक सोने की चेन है, जिसे बेचना है। फिर उन्होंने ठग से कहा कि चेन छुड़ाने के लिए 3000 रुपये चाहिए। लालच में आकर ठग ने पैसे भेज दिए। इसके बाद भूपेंद्र ने 500 रुपये ब्याज के नाम पर मंगवाए। फिर 4480 रुपये सुनार से चेन छुड़ाने के बहाने ऐंठ लिए। 10 मार्च को उन्होंने एक गोल्ड लोन की योजना बनाई। इसके बाद ठग से 3000 रुपये और ले लिए।
ठग को जब अहसास हुआ कि वह जाल में फंस गया है। साइबर ठग ने भूपेंद्र से अपने पैसे मांगे। एक 7 मिनट 27 सेकेंड की ऑडियो रिकार्डिंग में ठग को यह कहते हुए सुना गया कि भाई मुझे मेरे पैसे लौटा दो। मेरे बच्चों की होली है। मुझे उनके लिए पिचकारी और रंग खरीदने हैं।

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