मां की मौत के बाद पिता ने भी अनाथ छोड़ा, मासूम की ऐसी फरियाद कि जालौन डीएम हो गए भावुक

जालौन/उत्तर प्रदेश। जालौन जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई चल रही थी। अचानक एक नन्हा सा बच्चा, जिसकी उम्र महज 6 साल होगी, अपनी मौसी का हाथ थामे आगे बढ़ा। उसकी आंखों में एक अजीब सी उदासी थी, लेकिन चेहरे पर मासूमियत। उसने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे की तरफ देखा और बोला, “सर, मुझे पढ़ना है, बड़ा होकर एक पुलिस अधिकारी बनना है।” जैसे ही उसने अपनी दास्तां सुनाई, पूरा सभागार सन्न रह गया।
दरअसल, जालौन जिले के मुख्यालय उरई में जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान जब 6 साल का रामनारायण अपनी मौसी शिवानी के साथ डीएम राजेश कुमार पांडे के ऑफिस पहुंचा, तो उसने मासूमियत भरे लहजे में कहा, “सर, मुझे पढ़ना है, मुझे पुलिस अधिकारी बनना है।” मासूम की बात सुनकर डीएम के साथ-साथ पूरा सभागार कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गया।
रामनारायण ने डीएम राजेश कुमार पांडे को बताया कि वर्ष 2020 में उसकी मां मोहिनी का निधन हो गया था। मां के जाने के बाद उसे अपने ही पिता राजू ने घर से निकाल दिया। पिता ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। फिलहाल, वह अपनी मौसी शिवानी के पास रह रहा है, जो उसे अपने सीमित संसाधनों में पाल रही है।
बच्चे की मासूमियत और उसके हौसले ने सबका जीता दिल
डीएम राजेश कुमार पांडे ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि रामनारायण को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) का लाभ दिलाया जाए। इस योजना के तहत बच्चे को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उसके भरण-पोषण और शिक्षा का खर्च उठाया जा सके।
शिक्षा का अधिकार बनेगा सहारा
डीएम ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी चंदप्रकाश को निर्देशित करते हुए कहा कि रामनारायण का प्रवेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया जाए। साथ ही उसे पाठ्य पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और उनका भविष्य सुरक्षित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पुलिस अधिकारी बनने के सपने को पूरा करेगा प्रशासन- जिलाधिकारी
जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे ने इस मौके पर कहा कि प्रशासन हर जरूरतमंद के साथ खड़ा है और किसी भी बच्चे को उसके हाल पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने साफतौर पर कहा कि रामनारायण की हर संभव मदद की जाएगी और उसके पुलिस अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने में प्रशासन हर कदम पर उसके साथ है।
डीएम के आश्वासन के बाद मासूम को मिली नई उम्मीद
मासूम रामनारायण की यह दास्तां न सिर्फ एक बच्चे की तकलीफ को बयां करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि हौसले बुलंद हों तो प्रशासन भी मां की तरह अपनी गोद में सहारा दे सकता है। डीएम के आश्वासन के बाद अब रामनारायण के चेहरे पर एक नई उम्मीद की किरण नजर आ रही है, क्योंकि उसके सपने को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन मजबूती से आगे बढ़ेगा।

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