बाल मजदूरी : फतेहपुर में कलम की जगह फावड़ा चला रहा नाबालिक, वीडियो वायरल

पढऩे की उम्र में गांव के नाबालिग को ठेकेदार ने बना दिया मजदूर

फतेहपुर/उत्तर प्रदेश। फतेहपुर जिले में सड़क निर्माण कार्य के लिए नाबालिक के फावड़े चलाने का वीडियो सामने आया है। बच्चों का काम स्कूल जाना है न कि मजदूरी करना, लेकिन खखरेरू क्षेत्र के सूदनपुर गांव में स्कूल जाने की उम्र में नाबालिक सड़क बना रहा है। यह कड़वा सच है कि बाल मजदूरी बच्चों से स्कूल जाने का अधिकार छीन लेती है और उनकी शिक्षा में बहुत बड़ी रुकावट बनती है।वैसे तो पुरे जिले में शिक्षा के प्रति जागरुकता लाने और बच्चों को पढ़ाने के लिए शहरों से लेकर ग्रामों तक की दीवारे सर्व शिक्षा अभियान के नारों से पाट दी गई है, लेकिन मैदानी स्थिति में फतेहपुर जिले के ज्यादातर गांवों में वास्तविकता सर्व शिक्षा अभियान को आईना दिखाती नजर आ रही है। इसका उदाहरण परिपूर्ण न्यूज के संवाददाता सत्येंद्र शुक्ला के माध्यम से आपके सामने लाई गई तस्वीरें हैं।
जानकारी के अनुसार थाना खखरेरू क्षेत्र के अंतर्गत सूदनपुर गांव में पीडब्ल्यूडी द्वारा रोड पंचिंग /मरम्मत व सड़क निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। जिसमें ठेकेदार धर्मेंद्र सिंह परिहार द्वारा नाबालिग बच्चों से निरंतर रोड़ का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस ठेकेदार द्वारा नौनिहाल बच्चों के हाथो में कलम किताबों की जगह फावड़ा पकड़ाकर बाल मजदूरी करवायी जा रही है। जिसमें की भारत के बाल श्रम अधिनियमों व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। जहां पर उतर प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों के पढ़ाई-लिखाई में लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। श्रम अधिकारियों के रोडो भट्टों होटलों पर लगातार निगरानी न करने के कारण गरीबी में पढ़ लिख कर अपना भविष्य बनाने की जगह गरीब बच्चे बाल मजदूरी करने को बेबस हैं। इस संबंध में ठेकेदार से बात की गई उन्होंने नाबालिक लड़के के कार्य करने की जानकारी को अनभिज्ञता जताई।

सर्व शिक्षा, बाल सुरक्षा और श्रम कानूनों के साथ-साथ यहां, पंचायत राज अधिनियम की भी धज्जियां उड़ती नजर आई। ज्यादातर बच्चों का स्कूल जाना छूट गया है और जो स्कूल जा रही है उनके हाल भी कुछ ठीक नहीं है। न तो निर्माण कार्यों की कोई मॉनीटरिंग हो रही और न ही बालमजदूरी पर ही अब तक कोई सवाल उठाए गए। जिसकी वजह से ठेकेदारों व मालिकों के हौसले बुलंद है। कोई भी व्यक्ति जो 14 साल से कम उम्र के बच्चे से काम करवाता है अथवा 14-18 वर्ष के बच्चे को किसी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम देता है, उसे 6 महीने से 2 साल तक की जेल की सजा हो सकती है और साथ ही 20,000 -50,000 रूपए तक का जुर्माना भी हो सकता है।

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